जानिए साल के 12 महीनों में कैसे की जाती है संकष्टी चतुर्थी पर श्री गणेश की पूजा

आप सभी को बता दें कि कल यानी 22 फरवरी को संकष्टी चतुर्थी है. कहते हैं इस दिन भगवान गणेश के लिए व्रत रखा जाता है और उनका पूजन किया जाता है जो बहुत जरुरी माना जाता है. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं वर्षभर के हर माह की संकष्टी गणेश चतुर्थी का पूजन कैसे किया जा सकता है.

विधि -

1. कहते हैं चै‍त्र माह की चतुर्थी पर गणेश पूजन व्रत कर ब्राह्मण को सुवर्ण की दक्षिणा देने का विधान माना गया है.

2. आपको बता दें कि वैशाख माह में 'संकर्षण' गणेश का पूजन कर शंख, वस्त्र, दक्षिणा देने का विधान बताया गया है.

3. वहीं ज्येष्ठ माह में प्रद्युम्नरूपी गणेश का व्रत-पूजन कर फल-शाक-मूली दान देने को कहा जाता है.

4. इसी के साथ आषाढ़ मास में अनिरुद्धरूपी गणेश का पूजा-व्रत कर संन्यासियों को तूंबी इत्यादि देने का विधान माना गया है और इस दिन का बड़ा महत्व माना जाता है.

5. कहते हैं श्रावण मास में स्वर्ण के गणेश बनवाकर सोने की दूर्वा ही चढ़ा सकते हैं और इस प्रकार पांच वर्ष तक व्रत-पूजन कर सब कुछ हांसिल किया जा सकता है.

6. वहीं भाद्रपद (भादौ) माह में सिद्धिविनायक की पूजा करनी चाहिए और गौदान किया जा सकता है. इसी के साथ इक्कीस पत्तों को चढ़ाने का महत्व है और शमी पत्र, भंगरेया, बिल्वपत्र, दूर्वादल, बेर, धतूरा, तुलसी, सेम, अपामार्ग, भटकटैया, सिन्दूर का पत्ता, तेजपात, अगस्त्य, कनेर, कदलीफल का पत्ता, आक, अर्जुन, देवदारू, मरुआ, गांधारी पत्र तथा केतकी का पत्ता- इस प्रकार 21 प्रकार के पत्ते 'ॐ गं गणपतये नम:' कहकर चढ़ाने तथा व्रत-पूजन करने से भोग में लड्डू तथा समस्त सामग्री आचार्य को दान करने से (5 वर्ष तक) लौकिक तथा पारलौकिक सुख मिल जाते हैं.

7. कहते हैं आश्विन चतुर्थी को पूजन कर पुरुष सूक्त द्वारा अभिषेक बताया गया है.

8. वहीं कार्तिक शुक्ल चतुर्थी करवाचौथ कही जाती है और इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए.

9. आपको बता दें कि मार्गशीर्ष या अगहन चतुर्थी से किया जाने वाला व्रत अत्यंत कठिन तथा लगातार चार साल तक किया जाने वाला होता है.

10. ज्योतिषों के अनुसार पौष माघ की चतुर्थी पर विघ्नेश्वर का व्रत-पूजन कर दान-दक्षिणा देने से धन प्रात होता है.

11. इसी के साथ माघ मास में गजमुख गणेश का पूजन कर तिल के लड्डू चढ़ाने का विधान बताया गया है. इसी के साथ इसमें पार्थिव गणेश के पूजन को कर उन्हें अर्घ्य में लाल चंदन, पुष्प, दूर्वा, अक्षत, शमीपत्र, दही और जल मिलाकर देने से लाभ होता है.

12. वहीं फाल्गुन मास में दुण्डिराज गणेश का पूजन करते हैं.

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