रजनीकान्त और कट्टप्पा की खास मुलाक़ात

रजनीकान्त और कट्टप्पा की खास मुलाक़ात

रजनीकान्त : जब मै छोटा था तब हमारे गाँव मे लाइट नहीं थी तो भी मैने अगरबत्ती जला जला के अपने सारे काम किए है यहाँ तक की एक्टिंग की प्रैक्टिस भी।
कटप्पा : हमारे जमाने मे तो न लाइट होती थी न अगरबत्ती फिर भी मैंने गुजारा किया है।
रजनीकान्त : कैसे ?
कटप्पा : अरे हमारे गाँव मे पैदा होने वाले हर दूसरे बच्चे का नाम उजाला बच्ची का नाम बिजली और पति पत्नी मे से किसी का नाम रोशनी तो किसी का नाम प्रकाश रख दिया करते थे बस जब भी जरूरत पड़ती बैठा लेते थे पास मे। 
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एक टैक्सी चालक को चलती हुई टैक्सी में बैठे व्यक्ति ने पीछे से ही कुछ कहने के लिए टैक्सी चालक के कंधे पर हाथ रखा ही था कि चालक जोर से चीखा, घबराया और टैक्सी का संतुलन खो बैठा टैक्सी फुटपाथ पर चढ़ गई पैसेंजर भी गलती से लज्जित था।
टैक्सी ड्राइवर से माफी मांगी और कहा मुझे नहीं पता था कि मेरे हाथ लगाने से तुम्हारा ध्यान इस तरह भटक जाएगा। टैक्सी ड्राइवर ने चिढ़ने या नाराज होने की बजाय बड़ी विनम्रता से कहा "साब आपकी गलती नहीं है। टैक्सी चलाने का आज मेरा पहला दिन है पिछले 24 साल से मैं मुर्दे ढोनेवाली गाड़ी चला रहा था।"
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भोलेनाथ के मंदिर के पास एक कुत्ता बैठता था लोगो देख देख कर वह भी भगवान की पूजा करने लगा।
पूजा करते करते काफी दिन हो गए एक दिन कुत्ते की भक्ति सफल हुई भगवान शिव प्रसन्न हो गए और प्रकट होकर बोले : हम तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न है बोलो क्या चाहिए ?
कुत्ता जीभ बाहर लटकाए हुये : मुझे अगले जन्म कुत्ता ही बनाना प्रभु ।
भगवान शिव : नहीं, हम तुम्हें दो बार कुत्ता नहीं बना सकते है कुछ और मांग लो।
कुत्ता दो टांगों मे खड़ा होकर : ठीक है आप मुझे किसी बड़ी प्राइवेट कंपनी मे नौकरी दिला दो।
भगवान शिव : वत्स चालाकी नहीं, कहा न तुम्हें दोबारा कुत्ता नहीं बना सकते हैं। 
उदास कुत्ता मन मे सोचने लगा : प्राइवेट कंपनी मे नौकरी मिलना कितना मुश्किल है । :(:(:(