अब लोग चपरासी नही गोल्ड मेडलिस्ट के पापा कहेंगे....

Jan 21 2016 03:16 PM
अब लोग चपरासी नही गोल्ड मेडलिस्ट के पापा कहेंगे....

लखनऊ : सफलता किसी सुविधा की मोहताज नही होती है। इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है बाबा भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, लखनऊ की छात्रा रत्ना रावत ने। रत्ना ने यूनिवसिटी की एमसीए परीक्षा में टॉप किया है। यूनिवर्सिटी में 22 जनवरी को दीक्षांत समारोह आयोजित किया जा रहा है, जहां रत्ना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गोल्ड मेडल देकर सम्मानित करेंगे।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसी कॉलेज में रत्ना के पापा चौथी श्रेणी के कर्मचारी है। पिता ने रत्ना को बैंक से लोन लेकर प़ढ़ाया। उन्होने रत्ना के लिए कफी सघर्ष किया। जिस पिता ने बेटी को आगे बढ़ाने के लिए केवल एक वक्त का ही भोजन किया उसे रत्ना कैसे निराश कर सकती थी। इतना ही नही वो अपनी किसी भी इच्छा को पूरा करने से पहले बच्चों की इच्छा पूरी करते थे।

आगे रत्ना इसी यूनिवर्सिटी से पीएचडी करना चाहती है और प्रोफेसर बनना चाहती है। वे बतातीं हैं कि उनकी पढ़ाई के लिए उनके पिता ने काफी मुसीबतें झेली हैं। प्रोफेसर बनकर वह अपने पिता को वो हर खुशी देना चाहतीं हैं, जो उन्हें आज तक नहीं मिली। इतना ही नही रत्ना अपने भाई-बहनों को भी बेहतर शिक्षा देना चाहती है। रतना कुल 5 भाई-बहन है।