बीजेपी के चार साल और विकास की सच्चाई का सच

बीजेपी सरकार अपने चार साल के राज्य का जश्न मना रही है. ग्राउंड लेवल तक मार्केटिंग में महारथ हासिल कर चुकी पार्टी इस मौके को भव्य बनाने में जुटी हुई है और इसके जरिये फिर एक बार फिर अपनी मार्केटिंग स्किल को तराशना चाह रही है. हर जिले की हर तहसील तक या गांव गांव तक बीजेपी कार्यकर्ताओं को जश्न मनाकर सरकार के किये गए कार्यो ( सरकार के हिसाब से ) का बखान करने का आदेश दे दिया जा चूका है. तैयारी सिर्फ आज के जश्न की नहीं है.  ये 2019 का निशाना है. मगर अब तक मोदी ने चार साल में 36 विदेशी दौरे किये और 54 देश नाप दिए. मोदी की हवाई यात्रा ने उनके जमीन पर किये वादों से उनकी दुरी बढ़ाने का काम भी किया है. हर बड़े मुद्दे पर उनकी चुप्पी विपक्ष के साथ साथ जनता को भी खल रही है.

बहरहाल इन सब से शायद बेखबर बीजेपी अब नया नारा लाई है. 2014  में ''हर-हर मोदी, घर-घर मोदी'' के बाद ''सबका साथ सबका विकास'' से लेकर जुमलों का कारवां अब ''साफ नियत, सही विकास'' तक आ गया है. तगड़ी कैम्पेनिंग की जा रही है मगर आज भी ज्वलंत मुद्दे वही है जो 2014 से पहले थे. दावा किया गया था की 60 साल में जो काम नहीं हुआ वह चार साल में किया गया. मगर आज भी कश्मीर जल रहा है, आज भी गरीबी वही है, दुष्कर्म के आकड़े खुद गवाही दे रहे है, रोजगार के हालत सरकार खुद जानती है, कानून व्यवस्थाएं चीख चीख कर दुहाई दे रही है, नेताओं के कारनामों और बयानबाजियों से थाने, कोर्ट और अखबारों के काम बड़ा रहे है, किसान मर रहा है, न्याय तंत्र चरमरा रहा है और काला धन लाने के बीच लोग सफ़ेद धन भी विदेश लेकर भाग चुके है.

मगर  हवा का रुख अब भी बीजेपी के साथ है, इसका यह मतलब नहीं है कि बीजेपी मजबूत है, इसका कारण विपक्ष कि कमजोरी है. बहरहाल इस सब के बीच सरकार खुशफहमी में अपनी पीठ थपथपा रही है. कह रही है कि देश विकास कर रहा है......   

 

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