दूसरे शाही स्नान के दौरान, प्राकृतिक आपदा से 4 की मौत

उज्जैन : वैशाख मास की शुक्ल पक्ष तृतीया अर्थात् अक्षय  तृतीया पर उज्जैन में सिंहस्थ 2016 का दूसरा शाही स्नान हुआ लेकिन इस शाही स्नान पर मौसम की मार भी पड़ी। दरअसल दोपहर करीब 3 बजे से उज्जैन और इंदौर में तेज हवा और बारिश का असर रहा। प्राकृतिक आपदा के चलते 4 लोगों की मौत अलग-अलग घटनाओं में होने की जानकारी सामने आई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं।

उज्जैन के सिंहस्थ मेला क्षेत्र में तेज आंधी के चलते 500 से अधिक कैंप क्षतिग्रस्त हो गए। हालात ये रहे कि पांडालों में बने कमरों की छतें उड़ गईं। तो गेट धराशायी हो गए कहीं खुले आसमान के नीचे ही हलवाईयों को भोजन बनाना पड़ा। आंधी की रफ्तार करीब 12 किलोमीटर प्रति घंटा रही। हवा तेज चलने के कारण कुछ पांडालों के पास लगे बड़े पेड़ तक जमीन पर आ गिरे।

इन वृक्षों के नीचे पार्क किए गए वाहन दब गए। बड़नगर रोड़ क्षेत्र में लगे आनंद अखाड़े में इमली का पेड़ गिर गया। संत नित्यानंद के सदावल रोड़ स्थित आश्रम का द्वार भी क्षतिग्रस्त हो गया। चिंतामण रोड़ स्थित उत्तराखंड गोवर्धन समिति का पांडाल उड़कर सेक्टर कार्यालय में गिर गया। यही नहीं गौ उत्पाद भी बारिश से प्रभावित हुआ।

तेज बारिश से मेला क्षेत्र में कीचड़ पसर गया है। तो रामघाट पर शिप्रा में नाले का पानी मिल गया। इससे लोगों को कुछ असुविधा हुई।  हालात ये है कि विद्युत व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। मेला क्षेत्र में लोगों को अंधेरे में रहना पड़ रहा है। हालात ये रहे कि 1500 से अधिक पांडाल बारिश के चलते प्रभावित हुए। प्राकृतिक आपदा के चलते कई धार्मिक आयोजन स्थगित हो गए।

हालांकि अभी खतरा टला नहीं है। मौसम विभाग का कहना है कि शहर पर चक्रवात का असर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने बताया है कि करीब 5 दिनों से इंदौर, उज्जैन, भोपाल सहित कई शहरों में दक्षिण पश्चिमी हवा के चलते तेज हवा और बारिश का असर देखने को मिल रहा है। अरब सागर से नमी मिल रही है। यह नमी भाप बनकर उपर उठ रही है फिर ठंडी होकर बादल के तौर पर पानी बरसा रही है।

हालात ये हैं कि उत्तरी राजस्थान से ओडिशा तक द्रोणिका बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के ही साथ हवा की गति करीब 35 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक बढ़ रही है। आंधी और बारिश के कारण काफी नुकसान हुआ। अगले कुछ दिनों तक मौसम ऐसा ही बने रहने का अनुमान है। लोगों को चेतावनी दी गई है कि मेला क्षेत्र में दोपहर 3 बजे से रात्रि 10 बजे तक जाने से बचें।

इस दौरान अस्थायी तंबू में न ठहरें। बुजुर्ग, महिलाओं बच्चों को सावधान रहने के लिए कहा गया है। कहा गया है कि यदि मेले में कोई धार्मिक गतिविधी करनी ही है तो फिर तड़के 3 बजे से दोपहर 2 बजे तक पूर्ण कर लें। कलेक्टर कवींद्र कियावत ने मेला क्षेत्र के अधिकारियों को किसी भी हालात का सामना करने के लिए कहा है।

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