अनियमितताओं के चलते एफएमसी का सेबी में विलय

अनियमितताओं के चलते एफएमसी का सेबी में विलय

जिंस नियामक वायदा बाजार आयोग (FMC) को लेकर यह बात सामने आ रही है कि इसका विलय सोमवार को पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) में किया जाना है. यह भी कहा जा रहा है कि दो नियामकों को लेकर विलय का यह पहला मामला साबित होने वाला है. मामले में आपको यह जानकारी दे दे कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) का गठन शेयर बाजार के नियमन के लिए गैर-सांविधिक निकाय के तौर पर वर्ष 1988 में किया गया था. लेकिन पूर्ण स्वतंत्र शक्तियों के साथ वर्ष 1992 में यह एक स्वायत्त संस्था बन गई थी. साथ ही FMC के बारे में आपको बताये कि यह जींस बाजारों के नियामक के तौर पर काम कर रहा था.

लेकिन यहाँ शक्तियों की कमी भी रही जिसके कारण यहाँ बाजार में उतार-चढाव और साथ ही अनियमितताओं पर अंकुश नहीं लगाया जा सका. यह भी साफ कर दे कि शेयर बाजारों की तुलना में जिस बाजार में सत्ता गतिविधियों का खतरा भी अधिक देखने को मिलता है. और अब हाल ही में NSEL घोटाला सामने आया जिससे मार्केट में खलबली मच गई थी, इस मामले में सरकारी हस्तक्षेप के बाद से सेबी में FMC के विलय को लेकर घोषणा की गई थी.