फ़ितरत ही बदल गई

फ़ितरत ही बदल गई

ल तक उड़ती थी जो मुँह तक ,
आज पैरों से लिपट गई,
चंद बूँदे क्या बरसी बरसात की ,
धूल की फ़ितरत ही बदल गई..