सोलर ट्रेनें तैयार लेकिन यात्रियों के डर से नहीं हो रहा ट्रायल

जोधपुर : कोयले और भाप इंजन के बाद अब बिजली से चलने वाली ट्रेनें भी अब जल्द ही बीते दिनों की बात होने वाली है। रेलवे के जोधपुर स्थित वर्कशॉप में देश का पहला फुल सोलर ट्रेन तैयार किया जा चुका है। इन ट्रेनों में लाइट और पंखे सोलर एनर्जी के जरिए चलेंगे। लेकिन इस ट्रेन का ट्रायल नहीं हो पा रहा है।

दरअसल रेलवे को चिंता है, पैसेंजर इन ट्रेनों की छतों पर चढ़कर सोलर पैनल को नुकसान पहुंचा सकते है। नॉर्थ-वेस्ट जोन के चीफ इंजीनियर बी एल पाटिल ने कहा कि इन सट्रेन को फिलहाल उन रुटों पर नहीं चलाया जा सकता, जहां यात्री छतों पर चढ़ जाते है। ट्रायल के लिए अभी अप्रूवल मिलना भी बाकी है।

दरअसल, रेलवे बोर्ड ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत जोधपुर वर्कशॉप को 1.95 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट दिया है। इसके तहत सोलर पैनल वाले 50 कोच बनने हैं। शुरू में ऐसी ट्रेनों को दिन में ही चलाया जाएगा। बाद में सोलर एनर्जी को बैटरी में स्टोर कर शाम और रात में यूज करने की प्लानिंग पर काम होगा।

जयपुर में इस तरह की 22 ट्रेनें तैयार की जाएगी। आईआईटी बेंगलुरु ने सोलर पावर से जुड़ी एक रिसर्च की है। इसमें यह पता चला है कि 20 कोच की ट्रेन यदि साल में 188 चक्कर लगाती है, तो करीब 90,000 लीटर डीजल खर्च होता है। सोलर पैनल के कारण यह डीजल बचेगा यानि साल में कुल 48 लाख रुपयों की बचत होगी।

इससे पहले रेलवे ने पहले सोलर ट्रेन का ट्रायल पिछले वर्ष जून में किया था, जो कि रेवाड़ी-सीतापुर पैसेंजर ट्रेन में हुआ था।

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