लॉकडाउन के वजह से नहीं बेच पा रहे प्याज, बेमौसम बारिश से फसल ख़राब होने का डर

पूरे देश में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रसार की रोकथाम के लिए लॉकडाउन लागू कर दिया गया है. लेकिन इससे प्याज के किसानों को भयंकर नुकसान हो रहा है. लॉकडाउन के वजह से बाजारों तक पहुंचना और मंडियों के बंद होने के कारण से प्याज के किसानों को फसल की लागत से भी कम पर प्याज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. दरअसल इस साल प्याज का उत्पादन अच्छा हुआ था, लेकिन मंडियों के बंद होने से किसान धीरे-धीरे गहरे वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहे हैं. साथ ही खरीदारों की कमी और बेमौसम बारिश के वजह से फसल के बर्बाद होने की संभावना भी बढ़ रही है.  

वहीं, सांवेर, महू, देपालपुर और इंदौर के किसानों ने दावा किया है कि उन्होंने खरीददारों के न होने के चलते इस सप्ताह फसल की कीमत छह से सात रुपये प्रति किलो तय कर दी. किसानों ने बताया कि फसल की लागत ही आठ से नौ रुपये प्रति किलो है, लेकिन हमारे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है, इसलिए मजबूरन हमें इस कीमत पर फसल बेचने के लिए तैयार होना पड़ा. इंदौर जिले के कनाडिया गांव के रहने वाले एक किसान दिलीप मुकाती जिनके पास 500 बोरी का स्टॉक है. उन्होंने बताया है कि मैं अभी तक एक बोरी भी नहीं बेच पाया हूं. कुछ खरीददार खेतों पर आते हैं और मुझे सात से आठ रुपये प्रति किलो की कीमत देने को कहते हैं, जो कि लागत से बहुत ही कम है.

इस बारें में मुकाती ने बताया है कि किसानों के पास कोई चारा नहीं है, उनके पास दो ही रास्ते हैं, या तो वो जो कीमत मिल रही है उस पर अपनी फसल बेच दें. या फिर खुले आसमान में अपनी फसल को बर्बाद होते देखते रहे. किसानों ने ये भी दावा किया लॉकडाउन के बीच इस क्षेत्र में बिचौलियों की बढ़ती मौजदूगी से किसानों को भारी नुकसान हुआ है.

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