अमीन के चपरासी ने किसान के साथ किया ऐसा सलूक कि हो गई मौत

उत्तरप्रदेश : उत्तरप्रदेश में अमरोहा के गंगेश्वरी में यह बेहद ही संगीन मामला सामने आया है. सरकारी कर्मचारी किस तरह से अन्नदाताओं पर अपना रौब झाड़ रहे है यह तो आपने बहुत सुना होगा लेकिन इस बार जो मामला सामने आया है उसमे एक सरकारी अधिकारी की वहज से एक किसान की जान चली गई. मामला रविवार का रानीवाला गांव का है. आरोप है कि कर्ज में डूबे किसान उदय सिंह की अमीन के चपरासी के लात मारने की वजह से मौत हो गई. किसान की मौत की खबर लगते ही ग्रामीण आक्रोशित है.

जानकारी के मुताबिक सर्किल क्षेत्र के आदमपुर थाना क्षेत्र के गांव रानीवाला के रहने वाले 40 वर्षीय उदय सिंह खेती-किसानी करता था. पिछले सालो से लगातार उसकी फसल बर्बाद हो रही थी. उदय ने संभल के सौंधन स्थित बैंक की एक शाखा से कुछ लोन ले लिया था. लेकिन फसल ख़राब होने की वजह से वह कर्ज नहीं चुका सका. किसान पर करीब दो लाख कर्ज हो गया. इस पर बैंक ने तहसील के साथ मिलकर आरसी काट दी. इसके बाद संबंधित हल्के का अमीन किसान पर कर्ज जमा करने का दबाव बना रहा था. लाचार किसान अमीन और उसके चपरासी से बचने लगा था. शनिवार को भी अमीन अपने चपरासी के साथ गांव पहुंचा था लेकिन उदय सिंह नहीं मिला.

रविवार की दोपहर बाद अमीन का चपरासी फिर गांव पहुंच गया जिसे देखकर उदय सिंह ने भागने का प्रयास किया तो अमीन के चपरासी ने पीछा करते हुए उदय को लात मारी जिससे वह जमीन पर गिरा और उसकी मौत हो गई. किसान को मृतक देख चपरासी बाइक लेकर फरार हो गया. किसान की मौत के मामले में हल्का अमीन सुल्तान से पूछा गया तो उन्होने बताया कि शनिवार को गांव गए थे. लेकिन उदय सिंह गांव में नहीं मिला था. लेकिन रविवार को सरकारी छुट्टी होने को कारण गांव कोई नहीं गया. चपरासी भी बिना अनुमति के गांव नहीं जा सकता. उधर, तहसीलदार जसवीर सिंह का कहना था कि अमीन के चपरासी से बात हुई थी कि, वकील के माध्यम से दो दिन पहले किसान ने बैनामा कराया था. वकील ने गारंटी ली थी कि, कर्ज के रुपये जमा कराऊंगा. इसलिए गांव जाने का इनका कोई मतलब नहीं है. अमीन को इस मामले में फसाया जा रहा है. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और वह जांच में जुटी हुई है.

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