अर्थव्यवस्था में मंदी और निवेश में कमी है नए साल की बड़ी चुनौतियां

साल 2015 का अंत हो रहा है और इस दौरान विश्लेषकों के द्वारा इस वर्ष को लेकर समीक्षा की जा रही है. अब हल ही में यह बात सामने आई है कि केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह कहा है कि इस वर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी देखने को मिली है और इसके साथ ही निजी क्षेत्र के निवेश में भी कमी आई है. ये दोनों कारक नए साल में देश के लिए एक बड़ी चुनौती का काम कर सकते है.

उन्होंने आगे बात करते हुए यह भी कहा है कि जहाँ एक तरफ अर्तव्यवस्था को मजबूत करने वाले सेक्टर्स हमारे साथ आगे भी चलने वाले है तो वहीँ तीन ऐसे मुद्दे भी है जो अर्थव्यवस्था की चाल में रोड़ा बनकर सामने आ रहे है. और ये कारक मुख्यतः वैश्विक अर्थव्यवस्था, निजी क्षेत्र के निवेश में कमी और कृषि बने हुए है.

गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही वित्त मंत्रालय के द्वारा सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर के अनुमान को भी कम किया गया है. जी हाँ, बताया जा रहा है कि इसे घटाकर 7 से 7.5 फीसदी कर दिया जा चूका है. जेटली ने अपनी बात को जारी रखते हुए यह भी कहा है कि हमारे मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम के द्वारा जो आंकड़े पेश किये गए है हम उनके करीब होते यदि कृषि क्षेत्र हमारा साथ देता तो.

क्योकि कृषि हमारे देश का ऐसा सेक्टर है जिससे न केवल GDP बेहतर करने में मदद मिलती है बल्कि साथ ही कई महत्वपूर्ण सेक्टर्स पर भी असर होता है. इसके साथ ही जेटली ने देश के कई मुद्दों को लेकर चर्चा को अंजाम दिया है. जैसे सार्वजनिक निवेश, एफडीआई, दूरसंचार, तेल कीमतें आदि.

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