कोयला घोटाले में असम के प्रवर्तन अधिकारी गिरफ्तार

अवैध कोयला तस्करी रैकेट में कथित संलिप्तता के इलज़ाम में प्रवर्तन निरीक्षक, भाभा कलिता को कछार पुलिस ने हिरासत में लिया जा चुका है। कछार पुलिस द्वारा बराक घाटी में कोयले की तस्करी की शत्रुता के विरुद्ध अभियान को और भी तेज कर दिया है। जहां इस बात का पता चला है कि कछार जिले में गुमरा तस्करों के लिए अवैध तस्करी में आ चुका है। भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों की उच्च संलिप्तता की वजह से, बाद में यह पाया गया कि कोयले को लदे ट्रकों में ले जाया गया था, जिन्हें उनके द्वारा आसानी से पारित कर दिया गया है। गिरफ्तार पुलिस अधिकारी दिगरखाल का प्रभारी था।

मिली जानकारी के अनुसार कछार की पुलिस अधीक्षक रमनदीप कौर ने तस्करों और कोयला माफियाओं से निपटने और उनसे निपटने के लिए अभियान में तेजी लाने का एलान किया है। गुमरा और कटिगोरा  में अधिकारियों का कुल फेरबदल कर दिया गया है। हम बता दें कि मौजूदा अधिकारियों का अलग-अलग स्थान  पर ट्रांसफर कर दिया गया है। गिरफ्तार पुलिस अधिकारी से उपरांत में उपलब्ध दस्तावेजों और उसकी कथित संलिप्तता के विरुद्ध सूचना के आधार पर 24 घंटे से अधिक वक़्त तक पूछताछ की गई।

उत्तर पूर्व  में अवैध कोयला खनन और परिवहन इस क्षेत्र का अहम् आकर्षण रहा है। 2014 में कांग्रेस सरकार द्वारा अवैध कोयला खनन पर कड़ा प्रतिबंध जारी कर दिया गया था। ऑल दिमासा स्टूडेंट्स यूनियन और दीमा हसाओ जिला समिति ने एक याचिका तैयार की, जो खनन पर प्रतिबंध का आधार थी। याचिका में बताया गया है कि अवैध खनन धीरे-धीरे कोपिली नदी को अम्लीय कर चुका है। दुर्भाग्य से, प्रतिबंध का पूरी तरह से सम्मान नहीं किया गया है और उत्तर पूर्व क्षेत्र के कुछ भागों में अभी भी अवैध खनन और आजीविका के विनाश का को झेलना पड़ रहा है। वर्षों से प्रतिबंध के परिणामस्वरूप राज्य सरकार को 600 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है और जयंतिया हिल्स के पास के स्थानीय लोग खनन पर निर्भर हैं, जिससे उनके जीवन पर भी कई तरह से प्रभाव पड़ा है।

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