जानिए आखिर क्यों बढ़ रहा इलेक्ट्रॉनिक वाहनों का प्रचलन

जानिए आखिर क्यों बढ़ रहा इलेक्ट्रॉनिक वाहनों का प्रचलन

वर्तमान समय में पूरी दुनिया प्रदूषण समस्या से जूझ रही है। पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग समेत तमाम समस्याओं से जूझ रहा है। शहरों में गाड़ियों की बढ़ती भीड़ के चलते लोगों का जीना मुहाल हो गया है। प्रदूषण की वजह से लोग शहरों में रहना पसंद नहीं कर रहे है। और उपर रोज-रोज बढ़ते पेट्रोल डीजल के आसमान छूते दाम ने तो लोगों का बजट ही बिगाड़ कर रख दिया है। इन सब समस्याओं को देखते हुए ऑटोमोबाइल सेक्टर में अब इलेक्ट्रॉनिक वाहनों का प्रचलन बढ़ने लगा है। हर जगह अब इलेक्ट्रिक वाहनों की डिमांड बढ़ने लगी है।

भारत समेत तमाम देश आज के दौर में अब इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है, जिससे वाहन निर्माता कंपनियां इसके लिए प्रोत्साहित हों। भारत तेजी से मजबूत और किफायती इलेक्ट्रिक वाहन का माहौल तैयार करना चाहता है। ये भविष्य के वाहन हैं, इनसे कार्बन उत्सर्जन और कच्चे तेल पर निर्भरता को कम किया जा सकेगा और इससे नए अवसर तैयार होंगे। कई कंपनियां पहले ही अपनी इलेक्ट्रिक कार बाजार में उतार चुकी है, जिनमे महिंद्रा की e2o जैसी गाड़ी आती है। कुछ कंपनियां मार्केट में इलेक्ट्रिक कार उतारने की योजना बना रही है, जैसे किआ की इलेक्ट्रिक गाड़ी जो की किआ सोल EV पर बेस्ड होगी।

वहीं, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के पार्ट्स और अन्य कॉम्पोनेन्ट पर लगने वाले केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा यानि आयात शुल्क 15 प्रतिशत कम कर दिया है। अभी तक इलेक्ट्रिक वाहनों के पार्ट्स आयात करके भारत में जोड़ने के लिए पंद्रह से तीस प्रतिशत तक शुल्क देना पड़ता था।

सरकार के इस फैसले के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी पैक पर अब 5% आयात शुल्क देना होगा, जबकि मोबाइल फोन की बैटरी पर दोगुना यानी 20% तक का आयात शुल्क देना होगा। साथ ही केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए फेम इंडिया योजना भी शुरु की है। इस योजना के तहत पांच साल में करीबन 5,500 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहन खरीदने वालों को रोड टैक्स, रजिस्ट्रेशन फीस, पार्किंग चार्ज आदि में छूट दी जा सकती है। हालांकि 5 सालों में कितने इलेक्ट्रिक वाहन बेचे जाएंगे, इसका कोई लक्ष्य तय नहीं है। इलेक्ट्रिक वाहनों की डिमांड बढ़ाने चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदान करने वाली कंपनी इवीआई टेक्नोलॉजीज डेढ़ साल में देश भर में 20 हजार चार्जिंग स्टेशन लगाएगी।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ऑटो सेक्टर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भारत की नेशनल जीडीपी में लगभग 7 प्रतिशत और जीडीपी के निर्माण में करीब 50 प्रतिशकत का योगदान रहता है। वहीं भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में लगभग 30 लाख से ज्य्दा लोगों को रोजगार प्राप्त है। मोदी सरकार द्वारा पेश किए अंतरिम बजट के साथ 2030 तक भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में क्रांति लाने के मिशन को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसमें सरकार द्वारा ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में क्लीन एनर्जी को इस्तेमाल करने पर ज्यादा फोकस किया गया है। इस बजट में सरकार द्वारा 5 लाख रूपये सलाना आय वाले लोगों का टैक्स स्लैब से बाहर रखा गया है जो कार और बाइक खरीदने में निवेश करेंगे। साथ आने वाले समय में सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों की ही डिमांड रहेगी।