सौंदर्य पर उम्र का असर पड़ने से रोके

सौंदर्य पर उम्र का असर पड़ने से रोके

हर महिला की यह ख्वाहिश होती है कि उसका सौंदर्य सदैव बरकरार रहे। लेकिन प्रकृति के भी कुछ नियम हैं, जो जवान होता है वह बूढ़ा भी होता है। पुरुषों को तो कोई खास फर्क नहीं पड़ता लेकिन यदि महिलाओं के चेहरे पर झुर्रियां पड़ जाएं तो वह खासी परेशान हो जाती हैं। हों भी क्यों न,  आखिर जब उनके आगे पीछे कभी चक्कर काटने वाले जब उनको घास नहीं डालें तो उनका बेचैन होना स्वाभाविक ही है। चेहरे से किसी भी व्यक्ति की उम्र का अंदाजा लगाया जा सकता है। युवावस्था में चेहरे की त्वचा खिंची हुई रहती है। कहीं कोई झुर्रीया त्वचा का ढलकाव नहीं होता है। फिर धीरे-धीरे त्वचा पर आयु का प्रकोप होता है और यौवन की त्वचा वृद्धावस्था की त्वचा में परिवर्तित हो जाती है। 

अपने शरीर के वजन पर ध्यान दें। वजन अधिक होने पर वृद्धावस्था के लक्षण जल्दी आने लगते हैं। भोजन में वसा की मात्रा कम रखें। शरीर में जमा आवश्यक चरबी वृद्धावस्था को आमंत्रित करती है। जल, विटामिन तथा खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में लें। आवश्यकतानुसार व्यायाम करें। अत्यधिक धूप से त्वचा को बचाएं। अगर धूप में जाना ही पड़े तो छाते का प्रयोग करें। यदि चेहरे पर वृद्धावस्था के लक्षण उभर रहे हों तो फेस मास्क, कीमोएबरेजन, फेस लिफ्ट  आदि का भी प्रयोग कर सकती हैं।

फेस मास्क- फेस मास्क चेहरे की झुर्रियों को मिटाने का बिल्कुल सादा तरीका है। इसके लिए कई प्रकार के फेस मास्क प्रयोग में लाए जाते हैं। सामान्यत: प्रयोग होने वाले मास्क में मुलतानी मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है।

कीमोएबरेजन- इस थिरेपी में व्यक्ति का चेहरा स्पिरिट से साफ करके उस पर फीनोल तथा अन्य रासायनिक पदार्थ त्वचा के नीचे पहुंच कर झुर्रियों को कम करने में सहायक होते हैं। रासायनिक पदार्थों के कारण त्वचा की संरचना में मूलभूत परिवर्तन होता है जोकि सादे मास्क में नहीं हो सकता। महिलाओं के लिए शादी के बाद की उम्र ऐसी होती है जिसमें या तो वह नौकरीपेशा हो जाती हैं या घर के कामों में ही व्यस्त रहती हैं। इस समय कामकाजी महिलाओं को अपने आहार का खास याल रखना होता है। 

एक तो उनके पास समय कम होता है और काम ज्यादा होते हैं इसलिए उनके लिए नाश्ता तो बहुत ही आवश्यक है। नाश्ता हल्का और सुपाच्य होना चाहिए। साथ ही दोपहर का खाना ऐसा होना चाहिए जिसे खाकर सुस्ती न आए और कार्यक्षमता बनी रहे। दोपहर के भोजन में सभी पोषक तत्व विद्यमान होने चाहिए। यदि दोपहर के भोजन में सभी चीजें लेना संभव न हो तो यह कमी रात के भोजन में पूरी करें।