मंदिरों के सहारे वनवास खत्म करने की जुगत में कांग्रेस

Oct 15 2018 06:49 PM
मंदिरों के सहारे वनवास खत्म करने की जुगत में कांग्रेस

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों मंदिरों के खूब चक्कर काट रहे हैं। सोमवार को ही राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के ​दतिया में पीताम्बरा पीठ के दर्शन किए। यहां मां बगलामुखी के दर्शन कर राहुल ने सत्ता और सियासत की कामना की। अगर इस साल राहुल गांधी की मंदिरों की यात्रा को देखें, तो वह शिवभक्त, रामभक्त, नर्मदा के लाल से होते हुए अब मां के भक्त बनने की कोशिश में दिखाई दे रहे हैं।

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राहुल की यह यात्राएं कांग्रेस की हिंदू विरोधी छवि को तोड़ने की कोशिश की रणनीति का हिस्सा हैं। दरअसल, 2019 के चुनाव से पहले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं और इन विधानसभा चुनावों को 2019 का सेमिफाइनल माना जा रहा है, ऐसे में कांग्रेस मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में अपना वनवास खत्म कर फिर से सत्ता में वापसी की जुगत में लगी हुई है। कांग्रेस यह भली—भांति जानती है कि जब तक हिंदू वोट उससे  दूर रहेंगे, तब तक इन बड़े राज्यों में उसकी वापसी संभव नहीं है, इसीलिए कांग्रेस अध्यक्ष इन दिनों मंदिर—मंदिर घूम रहे हैं, ताकि अपनी छवि हिंदू विरोधी न बनाकर हिंदू समर्थक बना सकें। दरअसल, जब 2014 में कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर हुई थी, तो उसके पीछे आम जनमानस में उसकी छवि हिंदू विरोधी होना एक बड़ा कारण माना गया गया। इसलिए अब कांग्रेस चाहती है कि वह नरम हिंदुत्ववादी छवि बनाए, ताकि आगामी चुनावों में उसे इसका लाभ मिल सके

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इतना ही नहीं  राहुल गांधी एक विशेष रणनीति के तहत नरम हिंदू वादी रुख तो अपना ही रहे हैं, साथ ही वह अल्पसंख्यक वोटों को भी कांग्रेस से दूर नहीं जाने देना चाहते। इसलिए वह मंदिरों के साथ—साथ समय—समय पर मस्जिदों और चर्च, गुरुद्वारों में भी माथा टेक रहे हैं, ताकि कांग्रेस का परंपरावादी वोट बैंक उसकी हिंदुत्व नीति को देकर दूर न झिटक जाए। अब देखना यह है कि राहुल की यह नरम हिंदुत्ववादी छवि कांग्रेस के लिए आगामी चुनावों में संजीवनी साबित होती है या उनकी इस कोशिश को कांग्रेस की पुरानी ​छवि धूमिल कर देती है? 

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