आखिर कब बाहर निकलेगा माल्या - मोदी का जिन्न ?

इन दिनों केंद्रीय नेताओं के सामने एक बड़ा सवाल आ गया है, वह है राज्य सभा की 50 से अधिक सीटों पर सदस्यों का कार्यकाल पूर्ण हो जाने का। अब विभिन्न दल इन सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए अपनी - अपनी पार्टी की तैयारी में लग गए हैं। ललित मोदी गेट कांड, विजय माल्या को भारत लाने की मांग और अगस्ता वेस्टलेंड डील में भ्रष्टाचार का हंगामा कुछ दिन थमने वाला है ऐसा लगता है।

हालांकि भाजपा, कांग्रेस और अन्य दल अपनी - अपनी कैंपेनिंग कर सदस्यता के लिए काफी मेहनत कर सकते हैं लेकिन इस बीच आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी को 

भारत लाया जा सका है न ही बियर किंग विजय माल्या को। भारत सरकार ब्रिटेन पर अधिक दबाव नहीं बना सकी है जिससे वह माल्या को प्रत्यर्पित करे। 9 हजार करोड़ रूपए के बैंक लोन के मसले को काफी उछाला गया लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।

हालांकि भाजपानेतृत्व वाली मोदी सरकार यह स्पष्ट कर चुकी है कि माल्या के लोन की इतनी बड़ी रकम और अगस्ता मामला उसकी उपज नहीं है यह तो पूर्ववर्ती सरकार के ही प्रयासों का फल है।

तो दूसरी ओर ललित मोदी को लेकर भी भाजपा ने कांग्रेस को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया था। स्वयं ललित मोदी के कथित बयान भी कई बार राहुल और सोनिया से नज़दीकियों की बातें करते हैं। ऐसे में इन सभी मामलों में राजनीतिक पेंच बढ़ता नज़र आता है। बहरहाल फिर से कुछ समय के लिए यह मामले ठंडे बस्ते में जाते हुए नज़र आते हैं।

संसद का यह सत्र समाप्त होने के बाद जब  11 मई के बाद नए सदस्यों के साथ संद लगेगी तो संभव है कि सत्ता पक्ष का पलड़ा भारी होगा ऐसे में जीएसटी समेत कुछ बिलों के पारित होने की उम्मीद तो है लेकिन यह कहना मुश्किल है कि फिर माल्या - मोदी का जिन्न बाहर आएगा या नहीं। 

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