रोजा इफ्तारी से हो रही वोट बैंक की तैयारी!

इन दिनों रमजान का पवित्र माह चल रहा है। रमजान के इस पवित्र माह में रोजनदारों को रोजा इफ्तारी करवाकर लोग पुण्य लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं मगर इससे ज़्यादा तो इसका लाभ लेने की होड़ लगी है। ऐसे में राजनीतिक पार्टियां भी किसी से पीछे नहीं हैं।

आम आदमी पार्टी हो, आरजेडी हो, जेडीयू हो, भाजपा हो या फिर कांग्रेस सभी रोजा इफ्तारी के आयोजन में इस वर्ग को लुभाने में लगे हैं। रोजा इफ्तारी के इस आयोजन में सभी दल मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने में लगे रहते हैं। अब तो उत्तरप्रदेश विधानसभा के लिए यह चुनावी वर्ष है ऐसे में विभिन्न पार्टियों के नेता इस बार रोजा इफ्तारी में जमकर भागीदारी करेंगे।

आखिर मुस्लिम वर्ग को रोजा इफ्तारी के माध्यम से वोट बैंक के लिए साधना कितना उचित है। यूं तो विभिन्न दल हिंदू बनाम मुस्लिम की राजनीति करते हैं। ऐसे में ये रोजा इफ्तारी के माध्यम से क्या कहना चाहते हैं।

या यूं कहें कि गाहे बगाहे ये अपने इस वोट बैंक की ओर ध्यान दे ही देते हैं। कांग्रेस हो भाजपा हो या फिर कोई और दल रोजा इफ्तारी के माध्यम से मुस्लिमों के प्रति काफी सद्भावना दिखाई जाती है। आखिर ऐसे राजनीतिक दल जो कि हिंदूवादी विचारधारा को बढ़ावा देते रहे हैं वे भी रोजा इफ्तारी का आयोजन करते हैं और उसे महत्व देते हैं।

आखिर वे इस वर्ग को लुभाकर अपना राजनीतिक हित किस तरह से साधने का प्रयास कर रहे हैं जो दल मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति अपना रहे हैं जाहिर है वे तो अपने वोट बैंक को मजबूत करने में लगे हैं।

वोट बैंक की इस राजनीति में मुस्लिमों को एक तरह की खींचतान का सामना करना पड़ रहा है। अब तो रोजा इफ्तारी का आयोजन बढ़ चढकर होने लगा है। राजनेता इसे प्रचारित करने लगे हैं और अमुक को बुलाने को लेकर भी चर्चा होने लगी है।

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