इस तरह अपना कौमार्य खोने के बाद वापस पा लेती थीं द्रौपदी

Feb 13 2019 06:40 PM
इस तरह अपना कौमार्य खोने के बाद वापस पा लेती थीं द्रौपदी

दुनियाभर के सभी लोग इस बात से वाकिफ हैं कि द्रौपदी ने कभी चुप रहने में विश्वास नहीं किया था और उन्होंने धृतराष्ट्र से न्याय भी मांगा था लेकिन कुछ नहीं हुआ था. वहीं उसके बाद द्रोणाचार्य, कृपाचार्य और उनके पतियों जैसे महान योद्धाओं की भी निंदा हुई जो चीर-हरण के दौरान द्रौपदी को भी अपमान से नहीं बचा पाए थे. ऐसे में आप सभी को आज हम द्रौपदी के बारे में कुछ रोचक बातें बताने जा आरहे हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं.

1. कहते हैं द्रौपदी युवा रूप में पैदा हुई थी, इसलिए उनका बचपन नहीं था. महाभारत के अनुसार द्रौपदी का जन्म महाराज द्रुपद के यहाँ यज्ञकुण्ड से हुआ था और कहते हैं आज के दक्षिण भारत में द्रौपदी काली का रूप थीं, जो अभिमानी कौरवों का नाश करने के लिए कृष्ण की सहायता हेतु द्रौपदी के रूप में आईं थीं.

2. ऐसा भी कहा जाता है कि पांडवों के नियम के मुताबिक जब भी कोई एक भाई द्रौपदी के साथ एकांत में रहेगा तो दूसरा भाई कक्ष मे प्रवेश नहीं करेगा, इसी के साथ इसके लिए नियम था कि द्रौपदी के साथ वाला पांडव की पादुकाएं कक्ष के बाहर रहेंगी जो अन्य भाईयों को सूचित करेंगी की कोई एक भाई कक्ष में मौजूद है.

3. कहा जाता है द्रौपदी को वरदान था कि वह अपना कौमार्य वापस पा लेगी, ऐसे में द्रौपदी एक पति के बाद दूसरे पति के पास जाने से पहले अग्नि स्नान करती थी और उसे कौमार्य वापस मिल जाता था.

4. कहा जाता है एक बार जब भीम-हिडम्बा (राक्षसनी जो द्रौपदी के अलावा भीम की दूसरी पत्नी थी) का पुत्र घटोत्कच्छ अपने पिता के राज्य में भ्रमण करने आया था तो उसने अपनी मां हिडम्बा के कहे अनुसार द्रौपदी को सम्मान नहीं दिया और द्रौपदी ने उसे कम आयु होने का श्राप दे दिया था.

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