बड़ी खबर! ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नियमों में हुआ बदलाव! सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन

नई दिल्ली: वाहन चलाने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सरकार आपको बड़ी सहूलियत दे रही है। अब आपको एक बड़ी समस्या से छुटकारा प्राप्त होगा। ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए अब आपको रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) के चक्कर नहीं लगना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नियमों को बहुत सरल कर दिया है। सरकार की ओर से ड्राइविंग लाइसेंस के लिए नियमों में किए गए बदलावों के अनुसार, अब आपको डीएल के लिए RTO जाकर कोई ड्राइविंग टेस्ट देने की आवश्यकता नहीं होगी। केंद्रीय सड़क परिवहन तथा हाईवे मंत्रालय ने इन नियमों को नोटिफाई कर दिया है, ये नियम लागू भी हो चुके हैं। इतना ही नहीं, जिनके ड्राइविंग लाइसेंस के RTO की वेटिंग लिस्ट में पड़े हैं, उन्हें भी इससे राहत प्राप्त होगी। 

वही मंत्रालय की ओर से दी गई खबर के मुताबिक, अब ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए RTO में आपको टेस्ट की प्रतीक्षा नहीं करना पड़ेगी। आप ड्राइविंग लाइसेंस के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेनिंग विद्यालय में अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। उन्हें ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल से ट्रेनिंग लेना होगा तथा वहीं पर टेस्ट को पास करना होगा, विद्यालय की तरफ से एप्लीकेंट्स को एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर एप्लीकेंट का ड्राइविंग लाइसेंस बना दिया जाएगा। 

जानिए नए नियम:-
ट्रेनिंग सेंटर्स को लेकर सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की तरफ से कुछ दिशा-निर्देश और शर्तें भी हैं। जिसमें ट्रेनिंग सेंटर्स के क्षेत्रफल से लेकर ट्रेनर की शिक्षा तक सम्मिलित है। चलिए इसको समझते हैं। 

- दोपहिया, तिपहिया तथा हल्के मोटर वाहनों के ट्रेनिंग सेंटर्स के पास कम से कम एक एकड़ जमीन होना आवश्यक है
- मध्यम एवं भारी यात्री माल वाहनों या ट्रेलरों के लिए केंद्रों के लिए दो एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी।
- ट्रेनर कम से कम 12वीं कक्षा उत्तीर्ण हो तथा कम से कम पांच वर्ष का ड्राइविंग एक्सपीरियंस होना चाहिए, उसे यातायात नियमों का अच्छी प्रकार से पता होना चाहिए।  
- मंत्रालय ने एक शिक्षण पाठ्यक्रम भी तय किया है। इसके तहत हल्के मोटर वाहन चलाने के लिए, पाठ्यक्रम की अवधि अधिकतम 4 सप्ताह होगी जो 29 घंटों तक चलेगी।
- ड्राइविंग सेंटर्स के पाठ्यक्रम को 2 भागों में बांटा जाएगा। थ्योरी और प्रैक्टिकल।
- लोगों को बुनियादी सड़कों, ग्रामीण सड़कों, राजमार्गों, शहर की सड़कों, रिवर्सिंग और पार्किंग, चढ़ाई और डाउनहिल ड्राइविंग वगैरह पर वाहन चलाने के लिए सीखने में 21 घंटे खर्च करने होंगे।
- थ्योरी हिस्सा पूरे पाठ्यक्रम के 8 घंटे सम्मिलित होगा, इसमें रोड शिष्टाचार को समझना, रोड रेज, ट्रैफिक शिक्षा, दुर्घटनाओं की वजहों को समझना, प्राथमिक चिकित्सा और ड्राइविंग ईंधन दक्षता को समझना सम्मिलित होगा।

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