ड्राइवर का बेटा गरीब बच्चों को बना रहा आइआइटीयन

Sep 05 2015 05:08 AM
ड्राइवर का बेटा गरीब बच्चों को बना रहा आइआइटीयन

लहरो से डरकर नौका पार नही होती कोशिश करने वालो की हर नही होती......। कवि की पंक्तियो को चरितार्थ करते हुए अजयवीर सिंह के पैर गरीबी के आगे नही लड़खड़ाए। पिता ड्राइवर थे इस कारण से गरीबी ने पढ़ाई के मार्ग मे बाधा जरूर बनी। अपने सपनों की मंजिल तक पहुचने के लिए सिक्यूरिटी गार्ड तक की नौकरी की। इंडियन स्कूल ऑफ माइंस धनबाद से अप्लाइड फिजिक्स में बीटेक व एमटेक(फाइव इयर इंट्रीग्रेटेड) करने वाले अजयवीर सिंह ने पढ़ाई पूरी करने के बाद सोचा कि क्यों नहीं उन बच्चों को आइआइटी की तैयारी कराएं ,जो कोटा जैसी जगह नहीं जा सकते। बस फिर क्या था वर्ष 2011 में 7 छात्रों से शुरू हुआ अजयवीर सिंह का सफर अभी भी जारी है।

उत्तरप्रदेश के बनारस के चिरुईगांव विधानसभा निवासी पिता राधेश्याम यादव बस ड्राइवर व मां शीला यादव गृहणी हैं। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रहने के बाद भी अजयवीर के मन में आइआइटी करने इच्छा हुई। 2004-06 में 12वीं देने के बाद कोटा चले गए। कोटा में रहने का न ठिकाना न ही पढ़ाई के लिए कोचिंग इंस्टीच्यूट में पढ़ाई के लिए पैसा। शुरुआती दो दिन श्मशान घाट में बिताए। उसके बाद एक आश्रम में रहे। वहां पर साधु-संतों की सेवा करने के बाद पढ़ाई में मन लगाते। कुछ दिनों तक सिक्यूरिटी गार्ड की भी नौकरी की। इसी बीच रिजोनेंस के आरके वर्मा ने अजयवीर सिंह की प्रतिभा की पहचानकर परीक्षा की तैयारी कराई। अजयवीर ने भी निराश नहीं होने दिया।

जेइइ में 53 सौ से कम रैंक लाकर इंडियन स्कूल ऑफ माइंस में एडमिशन लिया। 2006 में एडमिशन लेने के 6 महीने के बाद 2007 से ही आइएसएम कैंपस के बाहर में बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे छात्रों को पढ़ाने के लिए एक जगह खोजी। उसके बाद बच्चों को पढ़ाने लगे। अजयवीर ने कैंपस प्लेसमेंट में बैठने से इंकार कर बच्चों को पढ़ाने का निर्णय लिया।

अजयवीर की विशेषता यह है कि वह स्वयं फिजिक्स, केमेस्ट्री व गणित की कक्षाएं लेते हैं। वर्ष 2011 में 7, 2012 में 14, 2013 में 13, 2014 में 18 व 2015 में 18 छात्र-छात्राएं आइआइटी में सफल हुए। अजयवीर सिंह का लक्ष्य गरीब बच्चो की पढ़ना है। समाज के लिए सेवा करना और सफल बनाना यही उसकी सौच है, अजायवीर का कहना है कि ऐसे प्रतिभाशाली छात्र जो की गरीबी के कारण पढ़ाई मे पीछे रह जाते है उन्हे उचित सुविधाए दे सकु।