वीडियो : गायत्री परिवार के सूत्रधार डॉ. पण्ड्या राज्यसभा के लिए मनोनीत

हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा, गायत्री परिवार का मंत्र यही कहता है. चहरे पर शालीनता और ह्रदय में युग निर्माण के उद्देश्य समूचे विश्व को एक सूत्र में पिरोने का स्वप्न देखने वाले गायत्री परिवार के मुखिया डॉ. प्रणब पण्ड्या के जी ज्ञान से, उनके प्रकाश से उनकी आध्यात्मिक चेतना से पूरी तरह वाकिफ होंगे. हाल ही में मोदी सरकार द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत होने वाले डॉ. प्रणब पण्ड्या जी ने समूचे विश्व में गयात्री परिवार के माध्यम से आध्यात्मिक जाग्रति का जो अनुष्ठान उन्होंने शुरू किया है, निश्चित रूप से हमारे समय का एक बड़ा आदर्श, प्रकल्प उन्होंने हमारे सामने रखा है. जो स्वप्न पण्ड्या जी ने अपनी आँखों से देखा है वो सपना उनकी आँख से स्थांतरित होकर कई देशो में पहुंच गया है. यानि उनके स्वप्न ने एक वृहत स्वप्न का आकार लिया है, और हम सब इस स्वप्न को अपने अंतःकरण में प्रकाशित कर इसे जमीन पर उतारने के लिए प्रयास करे.

प्रज्ञा पुरुष और गायत्री परिवार के मुखिया, श्रद्धा के केंद्र प्रणब पंड्या जिनका जन्म 8 नवम्बर 1950 को मुंबई में हुआ. लेकिन मध्यप्रदेश की धरती डॉ. पण्ड्या के लिए कर्मभूमि बनी और उनकी सारी शिक्षा दीक्षा मध्यप्रदेश में हुई. प्रदेश के एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज, इन्दौर से जनवरी 1972 में एम.बी.बी.एस. उत्तीर्ण करने वाले डॉ. प्रणब पण्ड्या ने इसी संस्था से दिसम्बर 1975 में मेडीसिन में एम.डी. की उपाधि में गोल्डमेडलिस्ट रहे. विद्यार्थी जीवन में उन्होंने न्यूरोलॉजी तथा कार्डियोलॉजी के प्रख्यात विशेषज्ञों से जुड़कर मार्गदर्शन प्राप्त किया. दुनिया के सामने जो ज्वलंत प्रश्न खड़े होते थे उस पर संत, ऋषि , मह्रिषी और विद्वान् विचार करते थे और दुनिया को रास्ता दिखाने का काम करते थे. एक सच्चे महापुरुष की भावभंगिमाए कैसी होती है, मध्यप्रदेश की धरती इस बात पर गर्व कर सकती है की जिसके व्यक्तित्व मे संस्कारो की कमक ओर विचारो मे परंपरा की खनक है.

आचार्या श्रीराम शर्मा जिन्होंने लगभग एक शताब्दी पहले गायत्री परिवार की संकल्पना की, आध्यात्मिक जाग्रति का एक विश्वव्यापी अभियान जिन्होंने शुरू किया, डॉ प्रणब पाण्ड्या को यह सोभाग्य प्राप्त हुआ की वह आचार्या श्रीराम शर्मा के अत्यंत प्रकट ओर प्रिय शिष्यो मे शुमार हो सके. ओर इस अभियान के सूत्र जब उन्होने अपने हाथ मे लिए तो यह जानते हुए गर्व होता है की आज 80 से भी ज्यादा देशो मे गायत्री परिवार की शाखाये संचालित है. वे जनू 1976 से सितम्बर 1978 तक भारत हैवी इलैक्ट्रिकल्स, लिमिटेड हरिद्वार तथा भोपाल के अस्पतालों में इन्टेंसिव केयर यूनिट के प्रभारी रहे. भारतीय चिकित्सक संघ (ए.पी.आय.) के सदस्य बने.

डॉ. पण्ड्या जी युग निर्माण योजना मिशन से 1963 में सम्पर्क में आये. सन् 1969 से 1977 के बीच गायत्री तपोभूमि मथुरा तथा शांतिकुंज हरिद्वार में लगे कई शिविरों में भाग लिया. सितम्बर 1978 में नौकरी से त्याग पत्र देकर स्थायी रूप से हरिद्वार आ गये. प्रणब पाण्ड्या जी चिकित्सा के स्टूडेंट रहे है लेकिन अध्यात्म, दर्शन ओर संस्कृति का जो मार्ग उन्होने प्रशशित किया है उसकी मिसाल, उनकी उपलब्धियों और अनुभवो से जोड़ सकते है. प्रणब जी अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख तो है ही, कुलाधिपति देवसंस्कृति विश्विद्यालय हरिद्वार, निदेशक ब्रह्मा वर्चस्व इंस्टीट्यूट और स्वामी विवेकानंदी योग विध्यापीठ महापिठान के वह अध्यक्ष है.

इसके साथ ही उन्हें ज्ञान भारती सम्मान से 1998 में सम्मानित किया गया . हिन्दू ऑफ दि ईयर पुरस्कार से एफ.आई.ए., एफ.एच.ए.द्वारा 1999 में सम्मानित हुए. अमेरिका की विश्वविख्यात अंतरिक्ष इकाई 'नासा' द्वारा वैज्ञानिक अध्यात्मवाद के प्रचार-प्रसार हेतु संस्तुति एवं विशेष सम्मान से नवाजे गए .भाई हनुमान प्रसाद पोद्दार राष्ट्र सेवा सम्मान" पुरस्कार से 2000 में सम्मानित. पंड्या जी कहना है कि गायत्री परिवार दुनिया का एक ऐसा परिवार है जो सर्व धर्म सम्भाव की प्रेरणा से ओतप्रोत है और विश्व को मानवता के विचारो और संस्कृति के सूत्र में पिरोकर एक नए युग का निर्माण करने की प्रेरणा देता है . 

"डॉ. पण्ड्या जी को उनकी उपलब्धि और विश्वहित में सराहनीय काम करने के लिए एवं राज्यसभा में मनोनीत होने के लिए न्यूज़ ट्रैक परिवार की तरफ से बहुत बहुत शुभकामनाए".  

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