वैज्ञानिक परिचर्चा में बोले डॉक्टर- 'कोविड संक्रमित मरीज अपनी मर्जी से ना कराएं सीटी स्कैन'

Apr 09 2021 10:07 AM
वैज्ञानिक परिचर्चा में बोले डॉक्टर- 'कोविड संक्रमित मरीज अपनी मर्जी से ना कराएं सीटी स्कैन'

इंदौर: मध्यप्रदेश में दिन पर दिन कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में हाल ही में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सभागृह में वैज्ञानिक परिचर्चा आयोजित की गई। इस दौरान डॉक्टर सलिल भार्गव ने कहा, 'कोविड संक्रमित मरीज अपनी मर्जी से सीटी स्कैन ना कराएं, इससे उत्पन्न होने वाले रेडिएशन हजार्ड् मरीजों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। कोरोना संक्रमित होने के बाद शुरुआती दिनों में सीटी स्कैन कराने से सही नतीजे भी नहीं मिलते हैं। इसलिए जरूरी है कि जब तक कोरोना लक्षण निर्मित ना हो या डॉक्टरों द्वारा सलाह ना दी जाए तब तक मरीज सीटी चेस्ट ना कराएं।' जी दरअसल इंदौर में कोविड मरीजों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती चली जा रही है। ऐसे में गंभीर रोगियों के उपचार, उपचार में समरसता के लिये एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के तत्वाधान में एक वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन किया गया है।

इस दौरान जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी एवं संभागायुक्त डॉ। पवन कुमार शर्मा विशेष रूप से शामिल हुए। इस परिचर्चा के दौरान एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ। संजय दीक्षित, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष मेडिसिन डॉ। वीपी पाण्डे, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष टीबी एण्ड चेस्ट डॉ। सलिल भार्गव, सह प्राध्यापक मेडिसिन डॉ। अशोक ठाकुर एवं सहायक प्राध्यापक मेडिसिन डॉ। प्रणय बाजपेयी सहित ऑनलाईन वर्चुअल मीट के माध्यम से शामिल हुए। इसी बीच परिचर्चा में बताया गया कि यदि किसी कोविड पॉजिटिव का ऑक्सीजन सेचुरेशन 94 प्रतिशत से कम आता है, तो उसे अस्पताल में भर्ती कर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ सकती है।

इसके अलावा मंत्री श्री सिलावट ने कहा, 'पिछले एक वर्ष से शासन एवं प्रशासन अपनी पूरी क्षमता के साथ कोरोना के विरूद्ध इस लड़ाई में निरंतर कार्यशील है। लेकिन कोरोना के विरूद्ध इस संघर्ष के असली योद्धा हमारे जिले के डॉक्टर्स है। जो अपने दृढ़संकल्प और इच्छाशक्ति के साथ अपना सर्वस्व न्यौछावर कर नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु कोरोना से लगातार लड़ रहे हैं। हमारे डॉक्टर धरती पर ईश्वर का रूप है। उनके कोरोना मुक्त इंदौर बनाने के इस दृढ़सकंल्प को मैं नमन करता हूँ। इंदौर के इस संकल्प का प्रभाव केवल प्रदेश पर नहीं बल्कि पूरे देश पर पड़ता है। मुझे पूरा यकीन है कि यदि कोरोना के विरूद्ध इस अभियान को जनआंदोलन का रूप दिया जायेगा, तो जीत इंदौर नागरिकों के संकल्प, सामर्थ्य और समन्वय की होगी।'

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