जांच-प्रक्रिया अपनाए बिना सीधे अरेस्ट नहीं किया जाये- मप्र हाई कोर्ट

जबलपुर: SC/ST एक्ट में परिवर्तन के खिलाफ विरोध और हिंसा के बीच मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जेपी गुप्ता की एकलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट के डॉ. सुभाष काशीनाथ महाजन संबंधी ताजा आदेश की रोशनी में अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एससी-एसटी एक्ट) के अंतर्गत की गई शिकायत में सिर्फ शासकीय कर्मचारी ही नहीं बल्कि प्राइवेट पर्सन को भी पुलिस द्वारा समुचित जांच-प्रक्रिया अपनाए बिना सीधे अरेस्ट नहीं किया जा सकता. इस संबंध में डीजीपी सहित अन्य दिशा-निर्देश का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करें. ऐसा न किए जाने की सूरत में अवमानना कार्रवाई की जा सकती है.


न्यायमूर्ति जेपी गुप्ता की एकलपीठ ने राज्य के डीजीपी को निर्देश दिया कि वे सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को इस संबंध में पत्र जारी करके अवगत करा दें. वहीं, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल (आरजी) को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों और सीजेएम को जानकारी भेज दें. मामले की सुनवाई के दौरान अग्रिम जमानत अर्जीकर्ता चरगवां निवासी अजीत और अंकित जैन की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन सिंह राजपूत ने पक्ष रखा. उन्होंने दलील दी कि चरगवां थाने में एससी-एसटी एक्ट के तहत आवेदकों के खिलाफ प्रकरण कायम किया गया है.

इस संबंध में सेशन कोर्ट से अग्रिम जमानत अर्जी खारिज किए जाने पर हाई कोर्ट की शरण ली गई है. चूंकि, सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. सुभाष काशीनाथ महाजन के मामले में 20 मार्च 2018 को ही महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, अत: बिना एसपी स्तर के अधिकारी की विधिवत जांच के सिर्फ शिकायत के आधार पर सीधे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. नियमानुसार पुलिस की जांच के बाद संबंधित मजिस्ट्रेट को पत्र जाएगा, उसके बाद ही कोई कार्रवाई संभव होगी. हाई कोर्ट ने तर्को से सहमत होकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए.       

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