आज ऐसे करें श्री महालक्ष्मीजी का पूजन

उज्जैन - आज बड़ी दिवाली है यानी महालक्ष्मी पूजन का दिन. इस दिन श्रीलक्ष्मी के साथ श्रीगणेश की भी पूजा की जातीं है इसलिए इसे महालक्ष्मी पूजा कहा जाता है .उज्जैन के ज्योतिषी पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, इस बार अमावस्या 29 अक्टूबर, शनिवार की रात करीब 8.45 से शुरू होकर रविवार रात 11 बजे तक ही है. इसके अलावा दिवाली पर प्रीति और बुधादित्य दो बहुत ही विशेष योग होने से सुखद संयोग बन रहा है.इन योगों में की गई लक्ष्मी पूजा से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति संभव बताई गई है.

बता दें कि महालक्ष्मी का पूजन विधि विधान से किया जाना चाहिए.इसके लिए माता की चौकी सजाना चाहिए. इसके लिए निम्न प्रक्रिया का पालन करें.सर्वप्रथम चौकी पर लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियां इस तरह रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे. लक्ष्मीजी और गणेशजी की मूर्तियां स्थापित करें. कलश को लक्ष्मीजी के पास चावल पर रखें.नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का आगे का भाग दिखाई दे और इसे कलश पर रखें. यह कलश वरुणदेव का प्रतीक है.अब दो बड़े दीपक रखें। एक में घी और दूसरे में तेल का दीपक लगाएं. एक दीपक चौकी के दाहिनी ओर रखें और दूसरी मूर्तियों के चरणों में.इनके अतिरिक्त एक दीपक गणेशजी के पास भी रखें.

इसी तरह पूजा की थाली के सम्बन्ध में भी शास्त्रों में जो उल्लेखित किया गया है उसके अनुसार लक्ष्मी पूजन में तीन थालियां सजानी चाहिए. पहली थाली में 11 दीपक समान दूरी पर रख कर सजाएं. दूसरी थाली में पूजन सामग्री इस क्रम से सजाएं- सबसे पहले धानी (खील), बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चंदन का लेप, सिंदूर कुमकुम, सुपारी और थाली के बीच में पान रखें.जबकि तीसरी थाली में इस क्रम में सामग्री सजाना चाहिए - सबसे पहले फूल, दूर्वा, चावल, लौंग, इलाइची, केसर-कपूर, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक रखना चाहिए. इस तरह थाली सजा कर लक्ष्मी पूजन कर अपने अभीष्ट की प्राप्ति की जा सकती है.

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