अनुशासित जीवन ही सच्ची प्रगति को हासिल करता है

Feb 22 2016 05:44 PM
अनुशासित जीवन ही सच्ची प्रगति को हासिल करता है

हमारे जीवन को हर एक मोड़ से गुजरने के लिए किसी न किसी नियम या पद्धति को अपनाना होता है. हमें हमारे जीवन को सही दिशा प्रदान करने के लिए सर्वप्रथम जरूरी होता है विचार विमर्श और  लक्ष्य और उसके साथ ही साथ कार्य को प्रगति प्रदान करने के लिए बेहद जरूरी है अनुशासन के साथ आगे बढ़ना और ऐसा करने से आपके द्वारा किये गए कार्यों में सफलता अवश्य रूप से मिलेगी . इसी के चलते हम आपको कुछ और शब्दों के माध्यम से अनुशासित जीवन से अवगत कराते है. प्राचीन  समय की बात है.  एक नगर था. वहां एक मठ था. उस मठ के एक वरिष्ठ भिक्षु रहते थे. उनके पास अनेकों सिद्धियां थीं, जिसके चलते उनका सम्मान होता था. सम्मान बहुत बड़ी चीज होती है . जीवन में व्यक्ति धन ,दौलत , जन  आदि तो पा लेता है पर प्रतिष्ठा हर किसी को नहीं मिल पाती वे यह सब जानते थे. इसलिए उनकी महत्वाकांक्षा और कुछ न थी।

एक दिन दोपहर के समय वह अपने शिष्यों के साथ ध्यान कर रहे थे. अन्य भिक्षु शिष्य भूखे थे. तब वरिष्ठ भिक्षु ने कहा, क्या तुम भूखे हो? वह भिक्षु बोला, यदि हम भूखे भी हों तो क्या? मठ के नियम के अनुसार दोपहर में भोजन नहीं कर सकते हैं.

वरिष्ठ भिक्षु बोले, 'तुम चिंता मत करो मेरे पास कुछ फल हैं. उन्होंने वह फल शिष्य भिक्षु को दे दिए. उसी मठ में एक अन्य भिक्षु थे वह मठ के नियमों को लेकर जागरुक रहते थे. वह एक सिद्ध पुरुष थे. लेकिन ये बात उनके सिवाय और कोई नहीं जानता था.

अगले दिन उन्होंने घोषणा की, जिसने भी भूख के कारण मठ का नियम तोड़ा है. उसे मठ से निष्काषित किया जाता है. तब उन वरिष्ठ भिक्षु ने अपना चोंगा उतारा और हमेशा के लिए उस मठ से चले गए.

अनुशासन के बिना सच्ची प्रगति संभव नहीं है. वरिष्ठ भिक्षु ने ऐसा ही किया. दरअसल यह याद रखना हमेशा जरूर है कि जीवन में जो सफलता या शक्ति हासिल हुई है, वह कठोर अनुशासन के फलस्वरूप ही मिलती है. व्यक्ति जीवन में धैर्य , संयम , अनुशासन ,से जीता है तो सफलता उसके कदम अवश्य चूमती है .