अनीता शर्मा, दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाना है इनका मकसद

Aug 04 2018 12:30 PM
अनीता शर्मा, दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाना है इनका मकसद

अमृतसर: 'कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, 
               एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों..' 

एक बड़े कवि की ये पंक्तियाँ अनीता शर्मा पर सटीक बैठती हैं. अनीता शर्मा पंजाब का एक जाना माना नाम है, जिन्होंने संघर्षों को रुकावट नहीं बल्कि सीढ़ी बनाकर अपना रास्ता तय किया है. 36 वर्षीय अनीता आईआईएम अमृतसर में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, किन्तु विद्यार्थियों को शिक्षा देने के साथ वे एक अन्य काम भी करती हैं, जिस काम ने उन्हें लोकप्रिय बना दिया है.

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अनीता शहर की बड़ी उम्र की महिलाओं और दिव्यांग लोगों को कार चलाना सिखाती हैं. खुद दिव्यांग होते हुए भी वे दूसरे दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार ड्राइविंग स्कूल चलती है. उनका कहना है कि अगर दिव्यांग व्यक्ति गाड़ी चलाना सीख लेते हैं तो ये उनके लिए कई अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित रहेगा. 

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अपने बारे में बताते हुए अनीता कहती हैं कि वे मात्र 6 महीने की थी, जब उन्हें पोलियो हो गया था. उन्हें बुखार के दौरान पोलियो ड्रॉप्स पिला दिए गए थे, जिसकी वजह से उन्हें रिएक्शन हो गया और उनके पैर 64 प्रतिशत ख़राब हो गए. वे बताती हैं कि जब उन्होंने कार चलाना सीखी थी, तो ये उनके लिए एक स्वतंत्र और सुखद अहसास था, क्योकि अब वे कहीं भी बिना किसी के सहारे के कहीं भी आ जा सकती थी. इसी तथ्य को देखते हुए उन्होंने दूसरे दिव्यांगों को भी ट्रैन करना शुरू किया, अनीता का सपना हैं कि वे अपने इस कार्य को बड़े स्तर पर करें और देश के सारे दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाएं. एक दिव्यांग होते हुए भी अनीता शर्मा का हौसला और जज़्बा देश के लोगों के लिए एक बड़ा प्रेरणास्त्रोत हैं.

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