कभी इतना सुनहरा था हमारा भारत, अंग्रेजों ने ऐसे उजाड़ा था 'सोने की चिड़िया' को

भारत के इतिहास को आपने कई बार किताबों में पढ़ा होगा लेकिन अफ़सोस हमेशा अधूरा ही पढ़ा होगा. आपने यह तो पढ़ा होगा कि भारत देश को ‘सोने के चिड़िया’ कहते थे लेकिन यह नहीं पढ़ा होगा कि आखिर ऐसा क्यों कहते थे? आपने यह तो पढ़ा होगा कि टैक्स कई प्रकार के होते है लेकिन आपने यह नहीं पढ़ा होगा कि आखिर यह टैक्स लागू कहाँ से किए गए? किताबों में अंग्रेजों और मुसलामानों का शासनकाल तो बताया लेकिन यह नहीं बताया कि 9000 साल पुरानी भारतीय सभ्यता कैसे आज भी अपना वजूद बनाए हुए है? आज हम आपको बताएँगे कि भारत देश को ‘सोने की चिड़िया’ क्यों कहाँ जाता था.

दरअसल, साल 1840 का भारत कुछ अलग ही था. उस वक़्त भारत देश व्यापार में सबका बाप था. आपको जानकर हैरानी होगी कि 80’s के वक़्त भारत देश का विश्व व्यापार में हिस्सा करीब 35% था जो अंग्रेजों को रास नहीं आ रहा था क्योंकि उस वक़्त कोई 1 या 2 उद्योगपति नहीं हुआ करते थे बल्कि हर व्यक्ति उद्योगपति हुआ करता था.

जी हाँ! भारत मसालों में विश्व का बड़ा निर्यादक था जिसके चलते दुनिया में कमाई के मामले में भारत का कुल 27% हिस्सा था. यहीं कारण था कि अंग्रेज व्यापार करते हुए भारत देश पर राज करना चाहते थे. इसके बाद अंग्रेजों ने भारत के राजाओं में फूट डालना शुरू कर दी और राजनीति करना शुरू कर दी. फिर क्या था, अंग्रेजों ने भारत में अपना वर्चस्व जमा लिया और कई तरह के टैक्स लागू कर दिए.

सबसे पहले टैक्स कि बात करें तो वह था सेंट्रल एक्साइस ड्यूटी एक्ट और टैक्स तय किया गया 350% मतलब 100 रूपये का उत्पादन हुआ तो 350 रूपये एक्साइस ड्यूटी देना होगी. इसके बाद सामान के बेचने पर टैक्स लगाया गया जो सेल्स टैक्स था और वह 120% था मतलब 100 रूपये का माल बेचो तो 120 रूपये सेल्स टैक्स दो. इतना ही नहीं फिर एक और टैक्स लाया गया जो इनकम टैक्स था और वह 97% था मतलब 100 रूपये कमाए तो 97 रूपये अंग्रेजों को दो.

इस तरह से भारत देश की कमर टूट गई क्योंकि पहले के वक़्त में भारत का हर व्यापारी अपने माल को बेचकर, बदले में सोना लेकर आता था जिसके चलते हर व्यक्ति के पास बहुत सारा सोना हो गया था इसलिए विश्व में भारत देश को ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाने लगा लेकिन अफ़सोस अंग्रेजों के आने के बाद से ही भारत देश की तख्ता पलट गई.

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