मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते राजीव सरकार ने सलमान रुश्दी की किताब पर लगाया था बैन ?

नई दिल्ली: पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने लेखक सलमान रुश्दी की विवादित पुस्तक 'सटेनिक वर्सेज' (The Satanic Verses) पर बैन लगाने के राजीव गांधी सरकार के फैसले का बचाव किया है। नटवर सिंह ने आगे कहा कि यह फैसला पूरी तरह से कानून व्यवस्था के मद्देनज़र लिया गया था। न्यूयॉर्क में शुक्रवार को रुश्दी पर हमला हुआ, जिसके बाद उनकी किताब एक बार फिर सुर्ख़ियों में आ गई है। 

बता दें कि, इस किताब पर वर्ष 1988 में बैन लगाया गया था, उस समय सिंह विदेश राज्यमंत्री थे। उन्होंने कहा कि वह किताब को प्रतिबंधित करने संबंधी फैसले में शामिल थे। उन्होंने तत्कालीन पीएम राजीव गांधी से कहा था कि यह किताब कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति उत्पन्न कर सकती है, क्योंकि लोग आक्रोशित हैं। नटवर सिंह ने आलोचकों के उन आरोपों को 'बकवास' बताया है, जिसमें कहा गया कि राजीव गांधी सरकार ने पुस्तक को प्रतिबंधित करने का फैसला मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण लिया था। उन्होंने कहा कि, 'मैं नहीं मानता कि यह (पुस्तक को प्रतिबंधित करने का फैसला) गलत था क्योंकि इससे कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हुई थी, खासतौर पर कश्मीर में। भारत के अन्य हिस्सों में अशांति पैदा हुई थी।'

पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि, 'राजीव गांधी ने मुझसे सवाल किया कि क्या किया जाना चाहिए। मैंने कहा कि मैंने पूरी जिंदगी पुस्तकों पर रोक का पुरजोर तरीके से विरोध किया, किन्तु, जब कानून व्यवस्था की समस्या आए तो भले रुश्दी जैसे महान लेखक की पुस्तक हो, प्रतिबंधित की जानी चाहिए। रुश्दी की किताब 'मिडनाइट चिल्ड्रेन' 20वीं सदी के महान उपन्यासों में शामिल है, मगर, 'सटेनिक वर्सेज' को प्रतिबंधित करने का फैसला पूरी तरह से कानून-व्यवस्था के कारण था।'

गौरतलब है कि 'सटेनिक वर्सेज' पुस्तक के प्रकाशित होने के बाद भारी विवाद हुआ और कई मुस्लिम इसे ईशनिंदा के रूप में देखते हैं। ईरानी नेता अयातुल्लाह खामनेई ने रुश्दी की हत्या का फतवा जारी कर दिया था। राजीव गांधी सरकार के फैसले का पुरजोर तरीके से बचाव करते हुए सिंह ने कहा है कि, 'मैं इसे पूरी तरह से न्यायोचित मानता हूं क्योंकि यह कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर हालात उत्पन्न कर सकती थी। उस वक़्त भावनाएं चरम पर थीं, खासतौर पर मुसलमानों की।'

हालांकि, नटवर सिंह ने यह भी कहा कि वह सलमान रुश्दी पर हुए हमले से व्यथित हैं। उन्होंने कहा कि, 'रुश्दी 75 साल के व्यक्ति है जो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते और साहित्य में योगदान दे रहे हैं। कोई दुष्ट आता है और उन्हें लगभग मार ही डालता है, वह भी तब जब वह न्यूयॉर्क में भाषण दे रहे थे।'

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