धुप ढली तब तुम याद आये

धुप ढली तब तुम याद आये

ब पत्तों की खरखराहट बजी तुम याद आये
जब सावन रुत की पवन चली तुम याद आये
जब पंछी बोले घर के सुने आँगन में तो तुम याद आये
रुत आई फूलों की तुम याद आये
दिन भर दुनियां के झमेलों में खोया रहा मैं 
जब शाम को दीवारों से धुप ढली तब तुम याद आये