VIDEO: MP में 3 बार पानी में तैरी भगवान नृसिंह की साढ़े सात किलो वजनी पाषाण मूर्ति

देवास: भगवान श्री राम के नाम के पत्थर नदी में तैर चुके हैं इस बात का प्रमाण रामायण में मिलता है। लेकिन इस समय अगर आपसे कोई पानी मे पत्थर तैराने की बात करें तो आप यकीन ही नहीं करेंगे। हालाँकि ऐसा होता है। जी दरअसल यह नजारा मध्यप्रदेश के देवास जिले के बागली विकासखंड की हाटपिपल्या तहसील में दिखाई देता है। यहां पर भगवान नृसिंह की साढ़े सात किलो वजनी पाषाण प्रतिमा पानी में तैरती है, और इस दृश्य के गवाह बनते है यहाँ उपस्थित होने वाले हजारों लोग। जी दरअसल यहां हर साल डोल ग्यारस के मौके पर भगवान नृसिंह की प्रतिमा को नदी में तीन बार तैराया जाता है।

 

इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। इस बार भी बीते 17 सितंबर यानि डोल ग्यारस के दिन नृसिंह घाट पर भमोरी नदी में भगवान नृसिंह की साढ़े सात किलो वजनी पाषाण प्रतिमा को 3 बार तैराया गया और यह तीनों बार तैर गई। मिली जानकारी के तहत कुल तीन बार तैरने के लिए जल सतह पर छोड़ा था। वहीं जब प्रतिमा तैरने लगी तो घाट पर मौजूद जनसमुदाय ने भगवान नृसिंह के जयकारे लगाए। ऐसा माना जाता है कि प्रतिमा का तीनो बार तैरने का अर्थ है कि आने वाला साल सुख-समृद्धि लाएगा।

हर साल यह आयोजन बहुत बड़े पैमाने पर किया जाता है लेकिन इस साल कोरोना प्रोटोकॉल के कारण प्रशासनिक सख़्ती दिखीं। अब जब इस साल भी तीनो बार प्रतिमा तैरी तो इसका आशय यह निकाला जा रहा है कि आगामी वर्ष सुखद होने वाला है! आप सभी को बता दें कि यहाँ के बुजुर्गों का कहना है कि नृसिंह भगवान की इस पाषाण प्रतिमा का इतिहास करीब 115 साल पुराना है। कहते हैं साल 1902 से हर साल भादौ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को यानी डोल ग्यारस के दिन नृसिंह भगवान की प्रतिमा तैराई जाने की परंपरा है।

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