भारत के टुकड़े करने की कोशिश अगर 'देशद्रोह' नहीं तो फिर क्या ? जानें शरजील इमाम का पूरा मामला

नई दिल्ली: दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के स्टूडेंट शरजील इमाम (Sharjeel Imam) की जमानत याचिका को साकेत कोर्ट ने ठुकरा दिया है. साकेत कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने और असम को भारत से काटकर अलग करने की बात कहने के मामले में JNU स्टूडेंट शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी है.

इस पहले दिल्ली पुलिस ने अदालत में कहा था कि UAPA के तहत राजद्रोह के एक मामले में अरेस्ट JNU छात्र शरजील इमाम ने अपने भड़काऊ भाषणों के माध्यम से मुसलमानों में निराशा की भावना पैदा करने का प्रयास किया था. वहीं शरजील इमाम ने इस मामले में जमानत याचिका दाखिल करते हुए पिछली सुनवाई में कहा था कि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि उनके भाषण से हिंसा हुई और न ही उसने हिंसा के लिए किसी को उकसाया है. जमानत याचिका में शरजील ने दावा किया था कि वह किसी भी विरोध या प्रदर्शन के दौरान कभी भी किसी हिंसा में शामिल नहीं था. वह एक शांतिप्रिय नागरिक हैं.

सुनवाई के दौरान शरजील के वकील तनवीर अहमद मीर ने कोर्ट में उनके भाषणों के कुछ अंश पढ़े और कहा कि वे राजद्रोह कानून के तहत नहीं आते हैं. उन्होंने कहा इस भाषणों में हिंसा का कोई मामला नहीं बनता. यह राजद्रोह की श्रेणी में कैसे है? उन्होंने कहा सड़कों को बाधित करना देशद्रोह इस तरह है? वकील ने उनके भाषणों की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि ''भारत से कुछ शहरों को काटने की बात देशद्रोह कैसे है, जब रेल रोको का आह्वान देशद्रोह नहीं है तो यह देशद्रोह कैसे है ?'' बता दें कि, शरजील इमाम ने अपने भाषण में मुस्लिमों से असम को काटकर अलग देश बनाने की बात कही थी, ऐसे में अगर देश के टुकड़े करने की बात को भी शरजील के वकील देशद्रोह नहीं मानते तो फिर कोर्ट ही उन्हें देशद्रोह की परिभाषा समझा सकता है. 

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