वायु प्रदूषण से दिल्ली की साँसें अटकी, अस्पताल में दोगुने हुए मरीज

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के लोगों को अगले एक सप्ताह तक प्रदूषण से खास राहत मिलती नज़र नहीं आ रही है. किसी बड़ी मौसमी गतिविधि के अभाव में प्रदूषण का स्तर ऐसे ही बने रहने का अनुमान है. दिल्ली में सोमवार को तीन इलाकों की हवा गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई. जबकि समग्र तौर पर दिल्ली की हवा निरंतर दूसरे दिन बेहद खराब श्रेणी में बनी रही.

दीपावली के बाद से ही दिल्ली के लोग भयावह प्रदूषण से जूझ रहे हैं. इस दौरान अधिकतर समय में वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के अंक से ऊपर यानी गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया है. हालांकि हवा की रफ्तार कम होने और पराली के धुएं का असर कम होने से दो दिनों से प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है. किन्तु वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब श्रेणी में बना हुआ है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, सोमवार को दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 353 अंक पर रहा. इस स्तर की वायु के बेहद खराब श्रेणी में रखा जाता है. इंडेक्स रविवार को 330 के अंक पर रहा था. बीते 24 घंटों में इसमें 23 अंकों की वृद्धि हुई है. दिल्ली के तीन इलाकों का सूचकांक सोमवार के दिन 400 के अंक से अधिक यानी गंभीर श्रेणी में रहा.

सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च यानी सफर के अनुसार, पंजाब और हरियाणा के खेतों में पराली जलाने की तीन हजार 125 घटनां रिपोर्ट की गई हैं. जबकि सोमवार के दिन दिल्ली की हवा में पराली के धुएं की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक रही. एक दिन पहले यानी रविवार को ये हिस्सेदारी 12 प्रतिशत दर्ज की गई थी. सर्वेक्षण के मुताबिक, बीते दो सप्ताह में डॉक्टर या अस्पताल जाने वाले परिवारों की दर 22 फीसद से बढ़कर 44 फीसदी हो गई है. प्रदूषण के दूसरे सप्ताह में 86 फीसदी परिवार दिल्ली-NCR में प्रदूषित आबोहवा के कारण एक या अधिक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है. तक़रीबन 56 फीसदी परिवारों में एक या उससे अधिक सदस्य प्रदूषित हवा की वजह से गले में खराश, खांसी और आंखों में जलन जैसी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं.

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