दाऊद पर शिकंजा

Sep 25 2015 07:32 AM
दाऊद पर शिकंजा

अंडरवर्ल्ड दाऊद इब्राहिम नाम का जिन्न हमेशा की तरह एक बार फिर बोतल से बहार निकला है। उसके करीबी छोटा शकील की माने तो वह 1993 मुंबई बम धमाके के बाद भारत लोटना चाहता था लेकिन तत्कालीन सरकार ने उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार का मानना है की दाऊद ने आत्मसमर्पण के लिए ऐसी शर्त रखी जिन्हे मानना संभव नही था। वरिष्ठ वकील रामजेठमलानी भी मानते है की मुंबई बम धमाको के बाद दाऊद भारत लोटना चाहता था और लंदन में उनकी उससे बात हुई थी।

ढाई दशक में दाऊद को लेकर खबरे उड़ती रही है। कभी उसके समर्पण को लेकर तो कभी उसके पाकिस्तान में ठिकाना बनाने पर। भारत से भागने के बाद अफ़वाए और चर्चाए खूब चली लेकिन सरकारी स्तर पर कभी कोई जानकारी सार्वजनिक नही की गई। जो जानकारी सामने आई उसे बताना चाहिए या नही, ये सरकार बेहतर जानती है। लेकिन मोस्टवांटेड सरगना को लेकर जनता भी तमाम तथ्य जानना चाहती है। क्या ये अच्छा नही हो की जो तथ्य मीडिया उपलब्ध करा रहा है वो सरकार की तरफ से मुहैया कराये जाए।

जिन तथ्यों को सरकार छुपाना चाहती है उनको छोड़कर बाकी का खुलासा किया जाए। दरअसल दाऊद का जिक्र होते ही मामला तूल पकड़ने लगता है। दाऊद देश का दुश्मन है लिहाजा उसे वोट बैंक की राजनीति से हटकर ही देखा जाना चाहिए। वह भारत लोटना चाहता था लेकिन अज्ञात कारणों से नही लोटा, ये इतिहास की बाते है। हमें और आगे देखना चाहिए। पूरा हिंदुस्तान यह जानता है की पाकिस्तान कभी यह नहीं स्वीकार नही करेगा की दाऊद ने उसके यहाँ शरण ले राखी है? दाऊद व उसके गुर्गे पूरी दुनिया में घूम रहे है और काला कारोबार कर रहे है लेकिन सवाल यह उठता है की ख़ुफ़िया एजेंसी क्या कर रही है? पाकिस्तान के अलावा दूसरे देशो पर दबाव बनाकर दाऊद को पकड़ा जा सकता है।

पिछली बातो का ढिंढोरा पीटने से कुछ हासिल नही होने वाला है। सवा अरब की आबादी वाला देश यदि अपने ही नागरिक एक अपराधी को इतने साल तक नही पकड़ सकता तो यही माना जाएगा की की उसके पास इच्छाशक्ति ही नही है। सवाल यह नही है की दाऊद के लेकर कौन क्या कहता है? सवाल यह अहम हो जाता है की हम वाकई कुछ करना चाहते है या नही? यदि नही चाहते है तो बाते बनाना छोड़ दे और अगर चाहते है तो कुछ करके दिखाए।

संदीप मीणा