यूपीए सरकार रिजर्व बैंक पर डालती थी दबाव

मुंबई - कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली यूपीए सरकार रिजर्व बैंक के गवर्नर पर अपने मन माफिक फैसले कराने के लिए दबाव डालती थी. यह खुलासा किया हैं आरबीआई के पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव ने .यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में दो वित्त मंत्रियों प्रणब मुखर्जी और पी चिदम्बरम के बारे में कहा कि दोनों निवेश बढ़ाने के लिए ब्याज दर घटाने के लिए दबाव डालते थे. इन संस्मरणों का उल्लेख सुब्बाराव ने अपनी पुस्तक ' हू मूव्ड माय इंटरेस्ट रेट ? ' में किया हैं.

2013 में पूरे हुए अपने पांच साल के टर्म में दोनों नेताओं की तनातनी झेलने वाले सुब्बाराव ने लिखा कि दोनों वित्त मंत्रियों का दबाव डालने का तरीका अलग था.मुखर्जी सीधे कहते थे कि ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए आरबीआई ब्याज दरें घटाए. जबकि चिदम्बरम दूसरे तरीके से बात करते थे .उनका कहना था कि फिस्कल कंसॉलिडेशन पर उनके प्रयासों को देखते हुए मुझे ब्याज दरें घटानी चाहिए. लेकिन मैंने इंकार कर दिया.

इससे चिढ़कर चिदंबरम ने एक अस्वाभाविक कदम उठाया और इंकार के रुख की जनता में आलोचना कर दी. तब चिदम्बरम ने कहा था कि अगर ग्रोथ की चुनौतियों से सरकार को अकेले ही निपटना हैं तो हम ऐसा भी करेंगे. आरबीआई के पूर्व गवर्नर सुब्बाराव ने बताया कि कई मौकों पर प्रणव मुखर्जी भी आरबीआई से नाखुश रहे .नाखुशी जताने के लिए सरकार के पास कई तरीके होते हैं .

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