743 सिलेंडर सहित एक लोडिंग वाहन जप्त, एजेंसी संचालक पर हुआ प्रकरण दर्ज

743 सिलेंडर सहित एक लोडिंग वाहन जप्त, एजेंसी संचालक पर हुआ प्रकरण दर्ज
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इंदौर/ब्यूरो। कलेक्टर इलैया राजा टी के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत खाद्य विभाग के अमले ने एक बड़ी कार्यवाही की है। आज क्वांटम उर्जा भारत गैस, बिहाड़िया इंदौर व्यावसायिक गैस सिलेन्डर की एजेंसी दल द्वारा लगातार शिकायत पर औचक जांच की गई। जांच के समय गोदाम बंद पाया गया एवं प्रोपरायटर धरेश मंडलोई को बुलाकर जांच की गई।

जिसमें गैस एजेंसी का रिकार्ड माह जून 2022 से भरा नहीं जाना पाया गया। मौके पर व्यावसायिक गैस सिलेंडर का वजन करने पर एक-एक सिलेंडर में दो किलो से ज्यादा गैस की मात्रा कम पाई गई एवं जांच के समय एजेंसी के ऑनलाइन रिकार्ड अनुसार भौतिक सत्यापन करने पर 19 किलोग्राम के 423 नग खाली सिलेंडर कम पाए गए एवं 47.5 कि.ग्रा. के 38 नग कम पाए गए एवं 05 कि.ग्रा के 65 नग भरे हुए कम पाए गए एवं 23 नग खाली ज्यादा पाए गए। 

उक्त कार्यवाही खाद्य विभाग के प्रभारी अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर के मार्गदर्शन में की गयी। जिला आपूर्ति नियंत्रक एम.एल. मारू ने बताया कि जांच में एजेंसी द्वारा वाहन क्रमांक एमपी 09 जीएच 6206 में बिना बिल वाउचर के 38 नग ले जाना पाए गए। यह भी पाया गया कि एजेंसी द्वारा व्यावसायिक सिलेंडर के अधिकृत उपभोक्ता क्षिप्रा प्रायवेट लिमिटेड एनराइज बाय सायाजी को जारी एसवी 05 सिलेंडर का होने के बावजूद 80 सिलेंडर तक एक समय में देना पाया गया। यह भारी मात्रा में गैस का प्रदाय एवं भंडारण होने से विस्फोटक विभाग के नियम के विरूद्ध भी है एवं आमजन एवं माल की सुरक्षा की दृष्टि से भी खतरनाक है।

इस प्रकार क्वांटन उर्जा भारत गैस एजेंसी द्वारा व्यावसायिक गैस सिलेंडर के प्रदाय, भंडारण, स्टॉक भाव सूची बोर्ड का संधारण नहीं करने, स्टॉक पंजी का संधारण नहीं करने, निर्धारित एसवी में दर्ज सीमा से अत्यधिक गैस सिलेंडर का प्रदाय करने, भौतिक सत्यापन में भारी मात्रा में सिलेंडर कम पाए जाने, बिना बिल वाउचर के भारी संख्या में सिलेंडर की सप्लाई करने इत्यादि जैसी गंभीर अनियमितता पाई गयी। यह द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (प्रदाय और वितरण विनियमन) आदेश 2000 का उल्लंघन पाए जाने पर गोदाम  में उपलब्ध सिलेंडर स्टॉक 743 सिलेंडर, लोडिंग ऑटो क्रमांक एमपी 09 जीएच 6206 को नियमानुसार जप्त किया गया। जिसका मूल्य 20 लाख 81 हजार 765 रूपये है। एजेंसी संचालक के विरूद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। 

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