वाराणसी में जुलूस के दौरान लाठीचार्ज, लगा कर्फ्यू

वाराणसी: भगवान शिव की नगरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी फिर से सुलग उठा है, शहर में बीते दिनों मूर्ति विसर्जन को लेकर हुए बवाल के विरोध में सोमवार को निकाली गई 'प्रतिकार यात्रा' जुलूस के दौरान कुछ अराजक तत्वों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, जिससे भगदड़ मच गई। जुलूस में शामिल लोगों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। जुलूस के गोदौलिया पहुंचते ही कुछ अराजक तत्वों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया और पुलिस की जीप और चार मोटरसाइकिलों में आग लगा दी। हालात बिगड़ते देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। पुलिस लगातार आंसूगैस के गोले और रबर बुलेट दागती रही। 

पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक हालात नियंत्रण में है, गोदौलिया चौक, लक्सा, मैदागिन, दशाश्‍वमेध और कोतवाली इलाकों को सील कर दिया है इन क्षेत्रो में कर्फ्यू लगाया गया है और बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है, पुलिस ने एक दर्जन से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। पूरे घटनाक्रम में आम लोगों सहित आधा दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं, प्रतिकार यात्रा में साध्वी प्राची और चक्रपाणि महाराज सहित देशभर के साधु-संत भी शामिल थे। इस दौरान साध्वी ने कहा कि प्रशासन ने मूर्ति विसर्जन को लेकर कोई समाधान नहीं निकाला, उन्होंने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुद साधु-संतों पर हुए लाठीचार्ज के लिए माफी नहीं मांगते, तब तक आंदोलन चलता रहेगा, दादरी मामले पर साध्वी प्राची ने कहा, "एक तरफ काशी में संतों पर लाठियां बरसाई जाती हैं और दूसरी तरह सीएम गाय काटने वालों को 45 लाख रुपये देते हैं।"

चक्रपाणि महाराज ने कहा कि सभी संत गोली खाने काशी पहुंचे हैं। अयोध्या, मथुरा, दिल्ली, महाराष्ट्र से भी साधु यहां आए हैं, प्रतिकार यात्रा स्वामी अविमुक्ते श्वरानंद की अपील पर निकाली गई थी। प्रतिकार यात्रा निकलने का रूट टाउनहॉल से मैदागिन चौराहा से गुजरते हुए चौक और गोदौलिया चौराहा से दशाश्वमेध घाट तक तय किया गया था।

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