नदी में गिरी कार, बेटी और नातिन बने मगरमच्छ का शिकार

श्योपुर - मौत कब किसे और कहाँ अपने आगोश में ले ले यह कोई नहीं जानता. कोटा में बीमार पत्नी को देख कर श्योपुर अपने घर लौट रहे एक डॉक्टर की कार बेकाबू होकर नदी में जा गिरी. डॉक्टर तो जैसे-तैसे जान बचाने में कामयाब रहे. लेकिन उनकी बेटी और नातिन की मौत हो गई. सोमवार सुबह डॉक्टर की बेटी और नातिन के शव क्षत-विक्षत हालत में बरामद हुए. मगरमच्छ उनके शव घटनास्थल से करीब ढाई सौ मीटर दूर खींचकर ले गए थे.

मिली जानकारी के अनुसार श्योपुर के बड़ौदा कस्बे में रहने वाले डॉ. ऊंकार सिंह गिल की बीमार पत्नी का कोटा में इलाज चल रहा है. रविवार को वे बेटी मनदीप कौर (35) और नातिन हरपल कौर (12) के साथ पत्नी को देखने गए थे. रात को ही वे कार से बड़ौदा कस्बा लौट रहे थे. रात 11.30 बजे वे श्योपुर-कुहांजापुर स्टेट हाईवे पर ललितपुरा स्थित अहेली नदी की पुलिया से गुजर रहे थे, जब उनकी कार 22 फीट नीचे नदी में गिर गई. तीनों गाड़ी से बाहर तो निकल आए, लेकिन किनारे आने में उन्हें बहुत परेशानी हुई. डॉ. गिल तो जैसे-तैसे किनारे आ गए, लेकिन उनकी बेटी मनदीप और नातिन हरपल नदी में ही फंस गई.

डा. गिल ने बताया कि इतने में मनदीप की आवाज सुनाई दी. पापा मुझे बचाओ, पापा मुझे बचाओ.मुझे न तैरना आता है और न ही शरीर उस वक्त साथ दे रहा था. मैं तो बेबस देखता रहा. मैंने देखा कि बेटी मनदीप नातिन हरपल को बचाने के लिए गहरे पानी की तरफ जा रही थी. एक पल में ही मां-बेटी दोनों गहरे पानी में समा गईं. और बाद में मगरमच्छ के शिकार बन गई.

हालाँकि हादसे के बाद आसपास के रहने वाले गांव के लोग भी मौके पर पहुंच गए थे. वे अहेली नदी में घुसते, मगरमच्छ डॉ. गिल की बेटी और नातिन के शव को शिकार बना चुके थे. रात को रेस्क्यू ऑपरेशन भी किया गया. कार तो निकाल ली गई, लेकिन डॉ. गिल की बेटी और नातिन के शव सोमवार सुबह बाहर निकाले जा सके जो क्षत- विक्षत अवस्था में मिले. 

दुर्घटना ने लील ली तीन जिंदगी

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