भोपाल : आखिर क्यों 6 दिन में ​मुस्लिम समाज में बढ़ गई मौत की दर ?

Apr 10 2020 05:28 PM
भोपाल : आखिर क्यों 6 दिन में ​मुस्लिम समाज में बढ़ गई मौत की दर ?

भोपाल: मध्य प्रदेश में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. वहीं भोपाल में कोरोना से अब तक 1 शख्स की मौत हुई है, लेकिन अप्रैल के पहले 6 दिनों में यहां मुस्लिम समाज में मौत की दर अचानक बढ़ गई है. शहर के दो बड़े कब्रिस्तानों में मार्च के महीने में 213 शवों को दफनाया गया था. यानी यहां हर दिन करीब 7 शव दफनाए गए लेकिन अप्रैल के शुरुआती 6 दिनों में ही यहां 93 शव पहुंच गए. यानी अब हर दिन 15 शव दफनाए जा रहे हैं. यह पिछले महीने की तुलना में दोगुना हो गई है. उधर, काशी के मणिकर्णिका घाट पर लॉकडाउन से पहले हर दिन करीब 100 शव दाह के लिए आते थे लेकिन अब इनकी संख्या 15-20 रह गई है.

कोरोना वायरस के वजह से देशभर में अब तक 200 से ज्यादा मौतें हो गई हैं. इन्हें इलेक्ट्रिक या गैस वाले शवदाह गृह में ही जलाया जा रहा है. इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौजूद रहती है. इस महामारी के अलावा जो लोग मर रहे हैं, उनके लिए भी शमशान और कब्रिस्तान में सतर्कता बरती जा रही है. कब्रिस्तानों में  शव दफनाने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के लिए पर्चे लगाए गए हैं तो शमशान घाटों में दूर से ही शव के उपर लकड़ी सहित अन्य सामग्री रख दी जाती है.

बता दें की भोपाल के जहांगीराबाद कब्रिस्तान में 1 से 31 मार्च तक 39 शवों को दफनाया गया है यानी की हर दिन औसतन 1 शव दफनाया गया, जबकि अप्रैल के शुरुआती 6 दिनों में ही यह 17 हो गए, यानी अब औसतन हर दिन 3 शव यहां पहुंच रहे हैं. ठीक इसी तरह सैफिया कॉलेज के पास वाले कब्रिस्तान में 1 से 31 मार्च तक 174 शव आए, यानी हर दिन औसतन 5 से 6 के बीच में शव आए जबकि अप्रैल के 6 दिनों में ही यहां 76 शवों को दफनाया गया यानी अब हर दिन 12 से ज्यादा शव यहां पहुंच रहे.

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