रेप की झूठी रिपोर्ट पर विवाहिता को 7 घंटे अदालत में खड़ी रखने की सजा दी कोर्ट ने

Sep 20 2015 01:52 PM
रेप की झूठी रिपोर्ट पर विवाहिता को 7 घंटे अदालत में खड़ी रखने की सजा दी कोर्ट ने

रोहतक। रोहतक में एक केस के तहत कोर्ट ने दुष्कर्म की झूठी शिकायत दर्ज कराने वाली विवाहिता को कोर्ट परिसर में सात घंटे खड़े रहने की सजा दी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक रोहतक शहर की शोरा कोठी की रहने वाली एक महिला ने पुलिस थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी जो की 6 सितंबर 2013 की बात है.  थाने की थी। उसका कहना था कि 23 अगस्त, 2013 को उसकी बेटी को दौलतपुर निवासी मंजीत बहला-फुसलाकर भगा ले गया।

मंजीत के विरुद्ध एक्शन लेकर पुलिस ने अपहरण की शिकायत दर्ज कर 14 सितंबर 2013 को इस महिला को हिसार रेलवे स्टेशन से ढूंढ़ लिया था व मंजीत तक भी पहुंच गई थी  पुलिस थाना हिसार में दोनों पक्षों के परिजनों को बुलाकर वार्ता की गई जिसमें युवती ने परिजनों संग जाने से इन्कार कर मंजीत के साथ जाने की इच्छा जाहिर की। युवती की जिद के कारण पुलिस को उसे मंजीत के साथ भेजना पड़ा। बताया गया है कि दो माह बाद युवती के परिजनों ने बेटी से संपर्क साध लिया। परिजनों ने सब कुछ भूलकर घर आने और फिर रीतिरिवाज से विदाई कराने का झांसा दिया। 

युवती के कहने पर मंजीत भी तैयार हो गया और ढाई माह बाद युवती परिजनों के पास लौट गई। लेकिन मायके आने के बाद उसने बयान बदल दिए। युवती ने पुलिस को शिकायत देकर मंजीत, उसके साथी मप्र निवासी प्रह्लाद, हिसार के मूठ रांगड़ान निवासी अजमेर के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करा दिया। सिटी थाने के आइओ ने जांच पड़ताल के बाद तीनों नामजदों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया।

युवती का बाद में किसी अन्य युवक से विवाह हो गया। अब उसकी एक बेटी भी है। अदालत ने मुकदमे की सुनवाई कर तीनों युवकों को निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया और झूठी शिकायत दर्ज कराने वाली विवाहिता को रोहतक की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिहल की अदालत ने अदालत परिसर में सुबह 9 से शाम 4 बजे तक कोर्ट में ही खड़ा रखा व इसके साथ-साथ 500 सौ रुपये का जुर्माना भी लगाया ताकि उसे अपनी गलती की अहसास हो, महिला के कारण अदालत भी बार बार पसोपेश में थी।