अब कचरे से बनेगा कोयला, भोपाल में लगेगा देश का दूसरा ऐसा प्लांट

नई दिल्ली: देश में भोपाल, वाराणसी के बाद दूसरा ऐसा शहर बनने जा रहा है, जहां सूखे कचरे से टॉरीफाइड चारकोल (कोयला) बनाया जाएगा। इसका इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। बिजली उत्पादन के लिए कोयले की कमी के मद्देनज़र यह भविष्य के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। इसके लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान और अन्य अफसरों की उपस्थिति में NTPC और नगर निगम के बीच करार हुआ। निगमायुक्त वीएस चौधरी कोलसानी ने अनुबंध पर दस्तखत किए। 

अनुबंध के तहत भोपाल नगर निगम NTPC को आदमपुर छावनी में 15 एकड़ जमीन मुहैया कराएगा। यहां 400 टन हर दिन सूखे कचरे से टॉरीफाइड चारकोल बनेगा। NTPC इस पर 80 करोड़ रुपए खर्च करेगा। खास बात यह भी है कि अभी निगम सूखे कचरे के निष्पादन पर प्रति वर्ष जो 4 करोड़ 86 लाख 18 हजार रुपए खर्च करता है, वह पूरी रकम बचेगी। हाल ही में इसी प्रकार से टॉरीफाइड चारकोल बनाने के लिए NTPC ने वाराणसी नगर निगम के साथ भी ऐसा ही करार किया है। दरअसल, NTPC इंदौर में भी ऐसा ही प्लांट लगाना चाहता था, किन्तु जमीन नहीं मिली।

इससे पहले सोमवार को ही भोपाल RNG प्राइवेट लिमिटेड और नगर निगम के बीच 200 टन गीले कचरे से बायो CNG बनाने का करार हुआ। कंपनी निगम को 20 वर्षों तक प्रतिवर्ष 83 लाख रुपए रॉयल्टी देगी और बाजार भाव से 5 रुपए कम की दर पर बायो CNG भी मिलेगी। यह प्लांट स्थापित करने पर कंपनी 40 करोड़ रुपए खर्च करेगी। खास बात यह है कि निगम अभी गीले कचरे के निष्पादन पर प्रति वर्ष 2 करोड़ 43 लाख 9 हजार रुपए खर्च करता है, यह रकम भी बचेगी। इन अनुबंध के वक़्त UADD के प्रमुख सचिव मनीष सिंह और विभाग के आयुक्त निकुंज कुमार श्रीवास्तव भी मौजूद थे।

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