मुंबई में बना यह कोरोना ऐप, मेघालय में हो रहा इस्तेमाल

महामारी को मात देने के लिए हर कोई अपने स्तर पर काम कर रहा है. कोई सड़कों पर फंसे लोगों की मदद कर रहा है तो कोई लोगों तक जरूरत के सामान पहुंचाने में सहायता कर रहा है. उधर, वैज्ञानिक भी अपने नए प्रयोगों और खोजों से देश की मदद करने में लगे हुए हैं. इसी क्रम में स्ट्रैटेजिक ईआरपी ने आईआईटी मुंबई के साथ ऐसे ऐप का निर्माण किया है, जो कोरोना से लड़ाई में खासा कारगर साबित हो रहा है. स्ट्रैटेजिक ईआरपी के मुताबिक, मेघालय ने इस ऐप का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया है.

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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि आईआईटी मुंबई ने कोरोनटाइन नाम का ऐप बनाया है. इससे पता लगेगा कि कोराना से संक्रमित व्यक्ति कहां-कहां घूम रहा है. जीपीएस के माध्यम से यह लगाना संभव हुआ है. इसके अलावा, क्वारंटीन पीरियड में रह रहा कोई व्यक्ति अपने घर या जहां उसे रखा गया है, वो जगह छोड़कर कहीं बाहर जाता है तो इसे ट्रैक किया जा सकता है. अगर कोई यूजर एक निश्चित जगह पर स्थित क्वारंटीन जोन से बाहर निकलता है तो एप्लीकेशन सर्वर को एक मैसेज चला जाता है. यह ऑटो डिटेक्ट करता है. इस ऐप को आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर गणेश रामाकृष्णन और प्रोफेसर मंजेश हनावल ने आईआईटी मुंबई के एलमुनी और स्ट्रैटेजिक ईआरपी के एमडी अश्विन गामी ने साथ मिलकर बनाया है.

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अपने बयान में अश्विन गामी ने बताया कि इस ऐप में जियो फेंसिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. अश्विन ने बताया कि ऐप समय-समय पर यूजर की जीपीएस लोकेशन की जानकारी सुपरवाइज कर रही एजेंसी के सर्वर पर पहुंचाती रहेगी. उन्होंने कहा कि मोटे तौर पर कहें तो यह ट्रैकिंग, ट्रेसिंग और अलर्ट का कंबिनेशन है. इसके अलावा यह ऐप कई भाषाओं में उपलब्ध है.

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