कोरोना बीमारी के कारण बदला दवा बाजार का ट्रेंड

कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी ने दवा बाजार का ट्रेंड भी बदल कर रख दिया है। आजकल अस्पतालों और मेडिकल स्टोर में सामान्य दिनों में बिकने वाली एंटीबायोटिक, दर्द निवारक और अन्य दवाओं की मांग कम हो गई है।उसकी जगह विटामिन सी, डी और सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार की दवा के अलावा मास्क, ग्लब्स और सैनिटाइजर ने ले ली है। यही वजह है कि कई दवा कंपनियां सैनिटाइजर, मास्क और ग्लब्स को बनाने पर ज्यादा जोर दे रही हैं।दरअसल, देहरादून में जब से कोरोना का संकट शुरू हुआ है तब से बाजार में कोरोना के लक्षणों से मिलते जुलते सर्दी, जुखाम, बुखार और खांसी की दवाएं बड़ी संख्या में बिकने लगी थी।

इसके अलावा लोग इम्यूनिटी बढ़ाने के चक्कर में विटामिन सी और डी की दवाएं भी खूब ले रहे हैं। जबकि डॉक्टरों का कहना है कि बिना डॉक्टर की सलाह इन दवाओं का सेवन खतरनाक साबित हो सकता है।इसके विपरीत अन्य कई दवाओं की डिमांड बहुत कम हो गई है। दून रिटेल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मल्होत्रा ने बताया कि लोग डॉक्टरों के पास कम जा रहे हैं। दूसरा पर्यावरण स्वच्छ होने के कारण कोरोना को छोड़कर अन्य बीमारियां कम हो रही हैं।जिससे इन दवाओं की बिक्री पर स्वाभाविक रूप से असर पड़ा है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें की  न्यूरो और अवसाद संबंधी दवाएं चूंकि लंबी चलती हैं, इसलिए कई लोगों ने डॉक्टरों की सलाह पर इसका ज्यादा समय का कोटा पहले ही खरीद लिया।वहीं, दून होलसेल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष नंदा ने बताया कि आजकल विभिन्न कंपनियों का जोर सैनिटाइजर, मास्क और ग्लब्स बनाने पर ज्यादा है। इसी तरह इंफ्रारेड थर्मामीटर भी खूब बिकने लगा है। छोटी-मोटी चोट और सामान्य बीमारियों में लोग कोरोना संक्रमण के डर से संभवत घर में ही घरेलू उपचार कर रहे हैं।मांस पेशियों में जकड़न व खिंचाव, पेट दर्द, सिर दर्द, त्वचा संबधी, न्यूरो, अवसाद संबंधी बीमारियों की दवा, एंटीबायोटिक, एंटीसेप्टिक आदि।

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