इन तकनीकों से कोरोना वायरस को किया जा सकता है खत्म

इन तकनीकों से कोरोना वायरस को किया जा सकता है खत्म

कोरोना वायरस इस समय दुनिया में तेजी से फैल रहा है। इस वायरस की वजह से हजारों लोगों की मृत्यू हो गई हैं, तो दूसरी तरफ लाखों लोग इसे संक्रमित हैं। ऐसे में इस महामारी को रोकने के लिए दुनियाभर की सरकारों ने कड़े कदम उठाएं हैं। इनमें सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर लॉकडाउन जैसी पाबंदियां तक शामिल हैं। इसके अलावा सरकारों ने इस वायरस पर लगाम लगाने के लिए अलग-अलग तरह की तकनीक का सहारा लिया है, जिनसे उन्हें काफी हद तक कामयाबी मिली है। तो आज हम आपको ऐसी खास तकनीक के बारे में बताएंगे, जिनके उपयोग से इस खतरनाक वायरस को रोका जा रहा है। आइए डालते हैं इन तकनीक पर एक नजर...

Artificial Intelligence तकनीक का हुआ उपयोग
कोरोना वायरस को रोकने के लिए दुनिया के अधिकतर देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, क्योंकि इस तकनीक से संक्रमितों को ट्रैक करना काफी आसान होगा गया है। वहीं, अब फ्रांस की तरह भारत भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सर्विलांस के जरिए लोगों की निगरानी कर रहा है। फिलहाल, इस तकनीक का उपयोग तेलंगाना में हो रहा है। उम्मीद की जा रही हैं कि आने वाले समय में देश के बड़े शहरों के साथ-साथ मेट्रो में भी इसका इस्तेमाल होगा।

मोबाइल कॉटैक्ट ट्रेसिंग तकनीक का हो रहा है उपयोग 
पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस से निपटने के लिए अलग-अलग तरह की तकनीक का उपयोग कर रही हैं। इनमें से एक है मोबाइल कॉटैक्ट ट्रेसिंग तकनीक। दुनियाभर के देश इस तकनीक के जरिए संक्रमितों की पहचान करने के साथ वायरस की जानकारी भी दे रहे हैं। अब इससे सरकारों का काम आसान हो गया है। वहीं, यह तकनीक जीपीएस की बजाय ब्लूटूथ पर काम करती है। वजह यह है कि इससे डिवाइस की बैटर पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता है। जीपीएस अक्सर बहुमंजिला इमारतों में सही तरह से काम नहीं करता है। आपको बता दें कि हाल ही में एपल और गूगल ने एक्सपोजर नोटिफिकेशन एपीआई कॉन्टैक्ट ट्रैसिंग को लॉन्च किया था। इस तकनीक के जरिए अब एंड्रॉयड और आईफोन यूजर्स आसानी से कोरोना संक्रमितों की पहचान कर सकेंगे। इसके अलावा दोनों डिवाइस के यूजर्स को कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने पर नोटिफिकेशन भी मिलेगी।

रोबोट देंगे कोरोना वायरस को मात
कोरोना वायरस का कहर इस कदर बढ़ गया है कि अब दुनियाभर की सरकारें अपने मेडिकल कर्मचारी और डॉक्टर्स की सुरक्षा के लिए रोबोट का इस्तेमाल कर रही हैं। इनमें डिलीवरी रोबोट, तापमान की जांच करने वाले रोबोट और साफ-सफाई करने वाले रोबोट शामिल हैं। आपको बता दें कि पिछले महीने ही रोबोटिक्स ब्रांड मिलाग्रो ने दिल्ली के एम्स अस्पताल में एडवांस एआई-पावर्ड रोबोट मिलाग्रो आईमैप 9 और ह्यूमनॉइड ईएलएफ रोबोट लगाने का एलान किया था।

विभिन्न प्रकार के डिवाइस हो रहा है इस्तेमाल
इस समय दुनिया के सभी देश अपने-अपने स्तर पर वायरस को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही अब सरकारें इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज का भी उपयोग कर रही हैं। इस कड़ी में हॉन्ग-कॉन्ग ने रिस्टबैंड, साउथ कोरिया ने सीसीटीवी और इंग्लैंड ने वायटलपैच का उपयोग किया है। इन डिवाइसेज के उपयोग से लोगों को ट्रैक करना आसान हुआ है। साथ ही सरकारों को इन डिवाइस से यह भी जानकारी मिली है कि यूजर्स किस जगह पर किसी संक्रमित व्यक्ति से मिले हैं या नहीं।

मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड में नेपाल और पाकिस्तान से पीछे रह गया भारत

इस एप के चार करोड़ यूजर्स का निजी डाटा हुआ चोरी

QR कोड स्कैन करके व्हाट्सप्प पर सेव कर सकेंगे नंबर