आयात खर्च होगा 14 अरब डॉलर, बनेगा नया रिकॉर्ड

नई दिल्ली : इस साल मानसून में कमी बनी हुई है और यह कहा जा रहा है कि इसके कारण ही उत्पादन भी कम होना है. साथ ही आपको यह भी बता दे कि यदि उत्पादन में कमी आती है तो इससे फसलों के दामों में भी कमी आना है. मानसून की धीमी चाल को देखते हुए हाल ही में यह बात भी सामने आई है कि इस साल खाने के तेल का आयात भी बढ़ सकता है और साथ ही यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि यह बढ़कर 14 अरब डॉलर पर पहुँच सकता है. इस बारे में हाल ही में जानकारी एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) के द्वारा दी गई है.

यह बताया गया है कि इस साल की मानसूनी बारिश दीर्घावधि में औसत से 12 प्रतिशत की कमी देखने को मिल रही है. इसके तहत ही एसोचैम के द्वारा यह बात भी सामने आई है कि यदि यह माना जाता है कि तिलहन का उत्पादन इस वर्ष में गत वर्ष के बराबर ही रहता है तो यह निश्चित है कि खाद्य तेल आयात खर्च 14 अरब डॉलर हो जायेगा, जोकि पिछले साल 10 अरब डॉलर रहा है.

गौरतलब है कि पिछले साल भी बारिश में कमी देखी गई थी और उस दौरान 10 अरब डॉलर आयात का खर्च था जोकि तब तक का सर्वाधिक था. सूत्रों का यह कहना है कि यदि ऐसा होता है तो यह एक नया रिकॉर्ड बन जायेगा क्योकि देश के कई राज्यों में तिलहन का उत्पादन कम होने के अनुमान है.

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