सियासी चक्रव्यूह में पिसती आम जनता, देखिए दिल्ली जल संकट को लेकर कैसे हो रही राजनीति !

सियासी चक्रव्यूह में पिसती आम जनता, देखिए दिल्ली जल संकट को लेकर कैसे हो रही राजनीति !
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नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय इस समय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जारी जल संकट को लेकर एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहा है, जिसमें रोज़ाना राज्य सरकारें ही अपनी बातों से पलटती जा रही हैं। कभी वे अदालत के सामने कुछ कहती हैं, तो अगले ही दिन उनका बयान बदल जाता है। ऐसा ही कुछ कोरोना काल में भी हुआ था, जब दिल्ली सरकार ये कहते हुए कोर्ट गई थी कि, केंद्र उन्हें ऑक्सीजन नहीं दे रहा, उनके पास ऑक्सीजन की कमी है। फिर जब केंद्र ने कहा कि, ऑडिट करा लेते हैं कि, आपको कितने ऑक्सीजन की जरूरत है और आपके पास कितना ऑक्सीजन है, तो दिल्ली सरकार कोर्ट में पलट गई और बोली, नहीं हमारे पास पर्याप्त ऑक्सीजन है, हम केस वापस लेते हैं। यानी आपदा के समय भी राजनीति, एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश। यही अब भी हो रहा है, जब दिल्ली की जनता पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है।      

दरअसल, दिल्ली में जारी जल संकट के बीच AAP सरकार ये कहते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी कि हिमाचल प्रदेश सरकार उसे 136 क्यूसेक पानी दे रही है, मगर हरियाणा सरकार उसे दिल्ली नहीं पहुँचने दे रही है। हरियाणा सरकार ने कोर्ट में हलफनामा भी दिया था कि, उसे हिमाचल से अतिरिक्त पानी नहीं मिल रहा है, जितना मिल रहा है वो दिल्ली के लिए छोड़ रही है। अब हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी खुद सर्वोच्च न्यायालय में कह दिया है कि उसके पास एक्स्ट्रा पानी है ही नहीं, तो वो दिल्ली को कैसे दे? 

इस बीच, शीर्ष अदालत ने जब AAP सरकार को टैंकर माफिया के मुद्दे पर घेरा और माफियाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में पूछा, तो पहले तो AAP सरकार ने ये बहाना बनाया कि टैंकर माफिया पर वो कैसे कार्रवाई करे, क्योंकि दिल्ली पुलिस उसके अधीन नहीं आती है। ये दलील सुनकर जब शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि तुम कार्रवाई नहीं कर सकते, तो हम दिल्ली पुलिस को आदेश दे देते हैं, तो फिर AAP सरकार अपने बयान से पलट गई। अब केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि टैंकर माफिया तो यमुना के उस पार यानी हरियाणा से ऑपरेट करते हैं, वो दिल्ली सरकार का क्षेत्र ही नहीं है, इसलिए दिल्ली पुलिस एक्शन नहीं ले सकती।

इस पूरी सियासी नूरा-कुश्ती से आप एक बात समझ सकते हैं, वो ये कि लोकसभा चुनाव तक दिल्ली और हिमाचल की सत्ताधारी पार्टियाँ, यानी कांग्रेस और AAP एक साथ खड़ी हुईं थीं, दोनों ने मिलकर भाजपा शासित हरियाणा को घेरने की पुरजोर कोशिश की। AAP सरकार ने आरोप लगाया कि, हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार तो उसके लिए पानी छोड़ रही है, लेकिन हरियाणा की भाजपा सरकार उसे दिल्ली पहुँचने नहीं दे रही। किन्तु, अब जब कांग्रेस और AAP ने दिल्ली, हरियाणा में अलग-अलग विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है और गठबंधन टूट चुका है, तो सुप्रीम कोर्ट में भी हिमाचल सरकार में भी पलटी मार ली। हिमाचल की कांग्रेस सरकार ने शीर्ष अदालत को कहा कि उसके पास एक्स्ट्रा पानी नहीं है, तो वो दिल्ली को क्या दे ? इस पूरे घटनाक्रम से यही निकलकर आ रहा है कि, ना तो हिमाचल ने एक्स्ट्रा पानी छोड़ा, और ना ही हरियाणा ने पानी रोका, लेकिन AAP सरकार के इस सियासी घटनाक्रम में आम जनता जरूर प्यास से तड़पने लगी। यही कोर्ट कचहरी करने की जगह यदि, दिल्ली सरकार अपने निवासियों को जल का इंतज़ाम करवाने पर ध्यान देती, तो शायद तस्वीर कुछ और होती। 

इससे पहले,  पिछली सुनवाई में भी सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली की AAP सरकार को फटकार लगाई थी कि वो कोर्ट में झूठ बोल रही है। दिल्ली सरकार न तो टैंकर माफिया के खिलाफ कोई एक्शन ले रही है और न ही जल संकट से निपटने के लिए कोई ठोस उपाय कर रही है। शीर्ष अदालत ने तो यहाँ तक कह दिया था कि अगर दिल्ली सरकार कार्रवाई करने में नाकाम है, तो अदालत खुद दिल्ली पुलिस को टैंकर माफिया के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दे देगी। अब सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार ने एक और नया आरोप लगा दिया है कि दिल्ली में सक्रिय टैंकर माफिया सारे हरियाणा से आते हैं और वो दिल्ली को क्षति पहुँचा रहे हैं।

बहरहाल, अभी जल संकट को देखते हुए शीर्ष अदालत ने कहा है कि दिल्ली सरकार अपर यमुना रिवर बोर्ड से अपील करे कि वो अधिक पानी दिल्ली के लिए छोड़े। चूँकि, सर्वोच्च न्यायालय पानी के बँटवारे की विशेषज्ञ नहीं है, इसलिए यमुना के पानी के बँटवारे की जिम्मेदारी उन्होंने अपर यमुना रिवर बोर्ड पर छोड़ दी है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने AAP सरकार से यह भी पूछा कि वो जल संकट से निपटने की क्या कदम उठा रही है, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमे कहा गया है कि वो दिल्ली में जल की बर्बादी रोकने के लिए कदम उठा रही है और पानी बर्बाद करने वालों पर जुर्माना भी लगा रही है, मगर हरियाणा के टैंकर माफियां के कारण पानी ही नहीं मिल पा रहा है और वो माफियाओं के विरुद्ध कोई कदम इसलिए नहीं उठा पा रही, क्योंकि वो इलाका हरियाणा का है।

इस मामले में शीर्ष अदालत ने बुधवार को ही सभी सरकारों को फटकार लगाई थी कि वो उसके सामने झूठ बोला रही हैं, लेकिन दिल्ली में सत्ता संभाल रही AAP और हिमाचल की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी की सरकारें अब भी अपना बयान बदलती जा रही हैं। ऐसे में शीर्ष अदालत इस मामले में क्या कदम उठाती है, ये देखने वाली बात होगी। वैसे गौर करने वाली बात ये भी है कि, दिल्ली में हर साल गर्मियों में पानी की किल्लत होती ही है, प्रति वर्ष इन महीनों में वहां टैंकरों के सामने लाइन में खड़े लोग देखे जाते हैं। वहीं, जब मानसून में पानी आता है, तो छठ पूजा के दौरान रसायन वाले झाग से भरी  यमुना की तस्वीरें भी देखने को मिलती हैं, यदि यमुना का ही ठीक से रख रखाव किया जाए, बारिश के पानी का संग्रहण किया जाए, तो इस समस्या को काफी कम किया जा सकता है। दिल्ली में पानी की किल्लत से बड़ी समस्या, जल प्रबंधन की है, लगभग 10 वर्षों से शासन कर रही AAP सरकार अब तक राजधानी के निवासियों को पर्याप्त जल उपलब्ध कराने में विफल रही है, अब वे हरियाणा, हिमाचल और यूपी से अतिरिक्त जल आपूर्ति की मांग कर रहे हैं।

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