क्या चीनी दीयों से रोशन होगी दीवाली?

दीपोत्सव के त्योहार दीपावली पर  घी के दीयों से घर को सजाने की परंपरा चली आ रही है. लेकिन आजकल बाज़ारों में चाइनीज़ इलेक्ट्रॉनिक झालरों और नकली दीयों की भरमार है. इन चाइनीज़ दीयों के कारण मिट्टी के दीयों की खरीदी 50% कम हो गई है.

चीन से आने वाले यह दीये प्लास्टिक के बने होते हैं.इन्हें मिटटी के दीयों जैसी डिज़ाइन में बनाया जाता है,जिनमें बाती की जगह छोटे बल्ब लगे होते हैं,जो बिजली से जलते हैं. आजकल एल.ई.डी. वाले दीये भी मार्केट में बहुत बिक रहे हैं. इनकी कीमत मिट्टी के दीयों से कम होने के कारण लोग इनसे घर को सजाते हैं. ऐसे में मिट्टी के दीयों से घर को सजाने की परंपरा की केवल खानापूर्ति की जाती है.

मिट्टी के दीयों में जहां परंपरा का वास है वही इन चाइनीज़ दीयों में केवल दिखावा नज़र आता है. प्लास्टिक के यह दीये भले ही सस्ते हों लेकिन यह ना केवल हमारी परंपरा,बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. घी वाले मिट्टी के दीये जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और कुम्हारों को भी आर्थिक संबल मिलता है. परंतु इन प्लास्टिक से बने चाइनीज़ दीयों से केवल चीन को ही फायदा है. आजकल सोशल मीडिया पर चल रहे मैसेज के कारण लोग इन चाइनीज़ दीयों का बहिष्कार कर रहे हैं इससे एक उम्मीद तो जगी है कि लोग मिट्टी के दीये खरीदेंगे और अपनी परंपरा को रोशन रखेंगे.

इस दिवाली घर पर ही बनाए colored paper lamp lantern

इस दिवाली सीमेंट से बनाए आकर्षक दिये और सजाए घर

 

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