चीन की दीवार पर नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा है

पूरी दुनिया में अपनी प्रसिद्धि पा चुकी चीन की ग्रेट वॉल ऑफ चाइना सोसाइट के सर्वे के मुताबिक शानहायगुआन से लेकर गोबी रेगिस्तान तक बनी यह महान दीवार अब एक अटूट संरचना नहीं रही। अब यह कई हिस्सों में बंट चुकी है। 1962 किलोमीटर दीवार टूट चुकी है। तेजी से पौधे भी उगने लगे हैं। कई टॉवर इतने जर्जर हो चुके हैं कि एक बारिश और तूफान में ही ढह जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक पर्यटन ने भी इस ऐतिहासिक संरचना को काफी नुकसान पहुंचाया है। विश्व के सात महान आश्चर्य में शामिल चीन की दीवार पर अब नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा है।

प्राकृतिक आपदा, प्रतिकूल प्राकृतिक परिस्थितियों और मानवीय लापरवाही के कारण दीवार का 30 फीसदी हिस्सा गायब हो चुका है। तथा यह धीरे धीरे अपना अस्तित्व खोती जा रही है जो एक चिंता का विषय है वहां के प्रशासन को इसके बारे में जल्द ही सोचना होगा । पत्थर और मिट्टी से बनी इस दीवार का निर्माण तीसरी शताब्दी ईसापूर्व में शुरू हुआ था, लेकिन ज्यादातर हिस्सा मिंग साम्राज्य के समय 14 से 17 शताब्दी के बीच बना। विदेशी आक्रमणकारियों से देश को बचाने के लिए यह निर्माण किया गया था।

 खबर के अनुसार वहां के कुछ लोग तो अपना मकान बनाने के लिए यूनेस्को के इस विश्व धरोहर स्थल से ईंटे तक चुरा ले जा रहे हैं। ईंट चुराने पर करीब 36 हजार रुपये जुर्माना है, लेकिन इस पर निगाह रखने के लिए कोई विशेष संस्था नहीं है। अगर वहां की सरकार इस और अपना ध्यान नही लगाएगी तो आने वाले समय में यह एक कोरी कल्पना बनकर रह जाएगी ।

 

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