छत्तीसगढ़ के इस गाँव में बुर्जुर्ग भी लेते है शिक्षा

रायगढ़ : छत्तीसगढ़ के इस गांव में पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं है फिर भी यंहा के लोग शिक्षा की राह पर चलकर मिसाल बन गए। जिले के धरमजयगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत बंगरसुता की आबादी 700 है। ढाई सौ परिवार वाले गांव में ज्यादातर आबादी आदिवासी व पनिका समाज के लोगों की है। शिक्षा को लेकर लोग इतने जागरूक हैं कि हर घर का एक सदस्य सरकारी या प्राइवेट सेक्टर में अच्छे पद पर नौकरी कर रहा है। 

एक - दूसरे की करते है मदद 
इस गांव में तीन समितियां बनाई गई है। जिसमें मिलन चौक, बजरंग चौक और महादेव चौक समिति है। नौकरी करने वाले सभी लोग पारंपरिक और धार्मिक उत्सव में भी आर्थिक सहयोग देते हैं। गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई या इलाज के लिए भी भरपूर मदद करते हैं। यंहा रहने वाले 70 साल के एक ग्रामीण  बताते हैं कि खरसिया सिविल अस्पताल में पदस्थ एक डॉक्टर (जो की इसी गांव के है) की पढ़ाई में आर्थिक स्थिति बाधा बन रही थी। तब गांव वालों ने मिलकर मदद की ताकि वे एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर सकें। 

यंहा के बुर्जुग अब भी पढ़ते है 
इस गांव में बीएड कर रहे गांव के ही एक व्यक्ति का कहना है कि स्कूल में पढ़कर कॉलेज जाने वाले युवा साथियों को प्रतियोगिता परीक्षा, पुलिस भर्ती, बैंकिंग, सहित अन्य प्रतियोगिता परीक्षा के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है, ताकि वे सफल हो सके। सरकारी सेवा में जिले के साथ अन्य राज्यों में कार्यरत गांव के अफसर या कर्मचारी सरकारी महकमे में अच्छी वेकेंसी निकलते तो गांव के स्टूडेंट्स को जानकारी देते हैं, तैयारी को लेकर भी गाडइ करते हैं। साथ ही यंहा के युवा बुजुर्गो को भी शिक्षा प्रदान करते है.

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