तीनो राज्यों के सीएम पर मंथन शुरू

विधानसभा चुनावो में एक बार फिर बीजेपी ने दिखाया की उसे रोक पाना फ़िलहाल किसी के बुते की बात नहीं है. पूर्वोत्तर राज्यों त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय के परिणाम तो यही कहते है.  त्रिपुरा में बीजेपी ने 35 सीटों पर जीत हासिल की है. नगालैंड  में बीजेपी को 11 सीटों पर और एनडीपीपी को 16 सीटों पर जीत हासिल हुई है. वही मेघालय में कांग्रेस ने 21 सीटें जीती हैं और बीजेपी को महज दो सीटें मिली हैं, एनपीपी को 19 और अन्य को 17 सीटें मिली हैं. जीत के बाद बीजेपी ने शनिवार को संसदीय बोर्ड की बैठक की जिसमे तीनों राज्यों में पार्टी की आगामी योजना के बारे में मंथन किया गया. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि संसदीय बोर्ड ने एक प्रस्ताव पासकर नगालैंड, मेघालय और त्रिपुरा की जनता को धन्यवाद देने के साथ ही जीत को प्रजातंत्र की जीत बताया गया है. नड्डा ने बताया कि त्रिपुरा में बीजेपी को दो तिहाई बहुमत मिला है, नगालैंड में बीजेपी गठबंधन की सरकार बनाएगी और मेघालय में बीजेपी गठबंधन की सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

बैठक में तीनों राज्यों के लिए पर्यवेक्षक की नियुक्ति की गई. जिसमे त्रिपुरा में नितिन गडकरी और जुएल उरांव, नगालैंड में जेपी नड्डा और अरुण सिंह, मेघालय में किरण रिजिजू और के एल्फोंस को ये कार्यभार दिया गया. ये पर्यवेक्षक तीनों राज्यों में जाकर नए-नए निर्वाचित हुए विधायकों से किसे मुख्यमंत्री बनाया जाए, इस पर चर्चा करेंगे और फिर पार्टी आलाकमान को विधायकों की राय से अवगत कराएंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जय और पराजय स्वाभाविक है. अगर रगों में लोकतंत्र है तो हार को भी स्वीकार किया जा सकता है. 2014 से मैं लगातार देख रहा हूं कि जो लोकतंत्र की दुहाई देते रहे हैं, वह पराजय को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. त्रिपुरा में हार के बाद लेफ्ट का बयान चौंकाने वाला है. विरोधियों के गलत प्रचार के बीच भी लोगों के बीच बीजेपी और भारत सरकार की अच्छाई पहुंच रही है. पार्टी कार्यकर्ताओं से पीएम मोदी ने कहा कि ये यात्रा NO ONE से WON और शून्य से शिखर तक की है. उन्होंने कहा कि जब सूर्य अस्त होता है तो लाल रंग का होता है और जब उदय होता है तो केसरिया रंग का होता है. देश होली के दौरान अलग रंगों से रंगा था, लेकिन आज हर रंग केसरिया रंग हो गया है.

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नॉन-सीरियस नेता की छवि को उभारते हुए राहुल गाँधी

 

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