ऐसे खास तरीके से होता है यहां बारातियों का स्वागत

ऐसे खास तरीके से होता है यहां बारातियों का स्वागत

शादी बारात के अलग ही रिवाज होते हैं. कई बार ऐसे होते हैं जिन्हें सुनकर ही आप हैरान रह जाते हैं. शादियों के बारे में कई रिवाज आपने सुने होंगे लेकिन आज हम ऐसे ही अनोखे रिवाज के बारे में बताने जा रहे हैं. आपने शादियों के दौरान फूल और मालाओं से बारातियों का स्वागत करते हुए तो खूब देखा होगा, लेकिन क्या आपने कीचड से बारातियों का स्वागत करते हुए देखा है.  ऐसा ही कुछ बताने जा रहे हैं हम. 

बता दें, मैनपाट का आदिवासी मांझी समाज आज भी अपनी अनोखी परंपरा व संस्कृति के लिए न केवल प्रदेश में बल्कि देश में भी चर्चित है. छत्तीसगढ़ में ये परंपरा आज भी चली आ रही है. इस समाज में बारातियों का स्वागत कीचड़ में सराबोर कर किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि लडक़ी पक्ष के लोग बारातियों के सामने इस खेल के माध्यम से अपने शौर्य का प्रदर्शन करते हैं, यह देखने में काफी आकर्षक होता है. मांझी समाज में 12 गोत्र हैं, जिनके अनूठे आयोजन हमेशा कौतूहल के विषय बने रहते हैं. सभी गोत्र की अपनी अलग-अलग परम्परा है.  

आपको बता दें, मांझी समाज का भैंस गोत्र व तोता गोत्र में विवाह की अपनी अनोखी परंपरा है. भैंस गौत्र में लडक़ी पक्ष के लोग बारात आने से पूर्व मिट्टी खेलने की तैयारी करके रखते हैं और बारात पहुंचने के बाद कीचड़ में एक-दूसरे को सराबोर करते हैं. इस दौरान मांझी समाज के साथ ही आसपास रहने वाले सभी लोग बारातियों के सामने मिट्टी खेलकर अपने शौर्य का प्रदर्शन करते हैं. जब कभी किसी मांझी के घर बारात पहुंचता है तो कीचड़ में खेलने के लिए हुजूम उमड़ पड़ता है.

बारात पहुंचने के सप्ताह भर पहले से खेत को पानी व मिट्टी डालकर तैयार किया जाता है. जब यह पूरी तरह से कीचडयुक्त हो जाता है तो बारात के पहुंचने पर वहां पर जमकर मिट्टी खेली जाती है. 

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